“एक दिन आएगा जब गांधी की जगह गोडसे की मूर्तियां लगेंगी क्योंकि गोडसे सही साबित हो चुके हैं और मुसलमान बार-बार गांधी को गलत साबित कर देता है”-

अभी जब ओवैसी ने बिहार के सीमांचल में 5 सीटें जीत लीं तो मुसलमानों ने एक बार फिर गांधी को गलत साबित कर दिया –

जब भारत बंटा तो बलूचिस्तान से बंगाल तक 9 से 10 करोड़ मुसलमान रहे होंगे… मुसलमानों ने अपने अलग देश के लिए रोना धोना मचाया और जंगी जुनून पैदा किया…

हिंदुओं का कत्लेआम किया तो गांधी ने देश का बंटवारा स्वीकार कर लिया । –

तब कांग्रेस में मौजूद सरदार पटेल लॉबी ने बिलकुल साफ कहा । अंबेडकर ने भी कहा कि सुनियोजित बंटवारा करो और सारे मुसमलानों को देश से बाहर कर दो…

पाकिस्तान भेज दो ताकी सांप्रदायिकता की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाए लेकिन गांधी नहीं माना और यहां भी मुसलमानों को रहने दिया –

अब टूटे फूटे भारत में 9 करोड नहीं 40 करोड़ मुसलमान हैं और वो (अधिकांशत:) पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना अपना जन्मसिद्ध अधिकार समझते हैं या फिर उसका समर्थन करते हैं या मुखर होकर विरोध नहीं करते हैं । –

यानी कुरान शरीफ के अनुयायियों ने बार- बार गांधी के पूरे अहिंसा, सांप्रदायिक सद्भाव और सामाजिक समरसता के सिद्धांतों को खारिज कर दिया है – अब अगर ओवैसी ये कहता है कि हम तुमको 15 मिनट में खत्म कर देंगे…

अगर कश्मीर से किसी मौलाना की आवाज उठती है कि अब देश में इतने मुसमलान हो गए हैं कि फिर से बंटवारा कर सकते हैं तो बार-बार गोडसे सही साबित होते हैं और गांधी गलत साबित होता है

  • मुसलमानों ने उस वक्त भी गांधी को गलत साबित कर दिया जब दिल्ली में छत से सुरक्षाबलों पर तेजाब की बाल्टियां उड़ेल दी गईं थीं । –

मुसलमानों ने उस वक्त भी गांधी को गलत साबित कर दिया जब शाहीनबाग में जिन्ना के समर्थन में नारे लगे ।

शरजील इमाम जैसा अलगाववादी विचारक भी गांधी को गलत साबित क

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