एक मुसलमान था जो रोज पान की दुकान पर पान खाने जाता था। एक दिन उसकी नजर वहाँ लगी हुई कन्हैया की तस्वीर पर पड़ी तो उसने पान वाले से पूछा भाई ये बालक किसका है और इसका क्या नाम है। पान वाला बोला ये श्याम है। खान साहब बोले ये बालक बहुत सुन्दर है, घुंघराले बाल हैं, हाथ में मुरली भी मनोहर लगती है मगर ये जिस जमीन पर खड़ा है वो खुरदरी है, इसके पैरों में छाले पड़ जायेंगे, इसको चप्पल क्यों नहीं पहनाते हो। पान वाला बोला तुझे दया आ रही है तो तू ही पहना दे।
ये बात खान भाई के दिल में उतर गई और दूसरे दिन कन्हैया के लिए चप्पल खरीदकर ले आया और बोला लो भाई मैं चप्पल ले आया बुलाओ बालक को। पान वाला बोला कि ये बालक यहाँ नहीं रहता है ये वृंदावन रहता है, वृंदावन ही जाओ। खान साहब ने पूछा की इसका पता तो बताओ कि वृंदावन में कहाँ रहता है पान वाला बोला इसका नाम श्याम है और वृंदावन के बांके बिहारी मन्दिर में रहता है। …
“खान साहब वृंदावन के लिए चल दिए वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में जैसे ही प्रवेश करने लगा तो मंदिर के पुजारी ने बाहर ही रोक दिया और कहा कि तुम दूसरे समाज के हो इसलिए मंदिर में तुम प्रवेश नहीं कर सकते। खान भाई यह सोचकर कि मेरा श्याम कभी तो घर से बाहर आयेगा मन्दिर के गेट पर ही बैठकर इन्तजार करने लग गया।
उसे इन्तजार करते-करते पूरा दिन निकल गया रात भी निकल गई भोर का समय था तो उसके कानों में घुंघरूओं की आवाज आई उसने खड़ा होकर चारों तरफ देखा कुछ दिखाई नहीं दिया फिर उसने अपने चरणों की तरफ देखा तो श्याम उसके चरणों में बैठा हुआ दिखते हैं। श्याम को देखकर खान भाई की खुशी का ठिकाना नहीं रहा मगर उसे बहुत दुःख हुआ जब कन्हैया के चरणों से खून निकलता हुआ देखा।
खान भाई नें कन्हैया को गोद में उठाकर प्यार से उसके चरणों से खून पूँछते हुए पूछा बेटे तेरा क्या नाम है कन्हैया बोला श्याम, खान भाई बोला तुम

नेहा अग्रवाल 9812757175

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