एडवोकेट हरिमोहन दूबे वरिष्ठ पत्रकार एवं संस्थापक अध्यक्ष पत्रकार समाज कल्याण सेवा समिति उत्तर प्रदेश।।।।
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अब्दुल्लापुर में सोफिया बानो को मकान खरीदने के बाद भी नहीं मिला कब्जा, प्रशासन बना मूक दर्शक

अंबेडकरनगर जनपद के शहजादपुर कस्बे स्थित अब्दुल्लापुर गांव में एक महिला को अपने खरीदे हुए मकान पर कब्जा न मिल पाने की घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित महिला सोफिया बानो ने वैधानिक प्रक्रिया के तहत मकान खरीदा था, लेकिन अब तक वह अपने ही मकान में रहने का अधिकार नहीं पा सकी हैं।

यह मामला कानून, न्याय और महिला सशक्तिकरण की सच्चाई को उजागर करता है, जिसमें एक महिला अपने हक के लिए दर-दर भटक रही है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।

वैध रूप से खरीदा गया मकान

सोफिया बानो ने कुछ महीने पहले अब्दुल्लापुर में स्थित एक मकान को सभी वैधानिक औपचारिकताओं के साथ खरीदा था। स्टाम्प पेपर पर रजिस्ट्री, तहसील कार्यालय में दाखिल-खारिज, और अन्य जरूरी कागजी कार्यवाही पूरी की जा चुकी है। उनके पास रजिस्ट्री की कॉपी, स्टाम्प ड्यूटी की रसीद, और अन्य दस्तावेज भी मौजूद हैं जो यह साबित करते हैं कि मकान अब उनकी कानूनी संपत्ति है।

अवैध कब्जा बना परेशानी का कारण

मकान खरीदने के बाद जब सोफिया बानो ने उस पर कब्जा लेने की कोशिश की, तो स्थानीय विपक्षी व्यक्ति—जिसकी पहचान मोहल्ले के ही एक दबंग व्यक्ति के रूप में हुई है—ने जबरन कब्जा नहीं छोड़ने की जिद पकड़ ली। सोफिया बानो का आरोप है कि विपक्षी व्यक्ति न केवल कब्जा जमाए हुए है, बल्कि उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी भी दे रहा है।

उच्च अधिकारियों की चुप्पी बनी चिंता का विषय

इस पूरे प्रकरण की जानकारी स्थानीय पुलिस, उप-जिलाधिकारी (SDM), तथा जिलाधिकारी (DM) को दी जा चुकी है। सोफिया बानो ने थाने में कई बार शिकायत दर्ज करवाई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिला। प्रशासन की निष्क्रियता और उच्च अधिकारियों की चुप्पी ने पीड़िता को गहरे मानसिक तनाव में डाल दिया है।

स्थानीय लोग भी इस मामले को लेकर नाराज़गी जता रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि एक महिला अपने वैध संपत्ति के हक के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर है, तो आम जनता की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकती है?

कानूनी रास्ता और सामाजिक समर्थन

थक-हार कर सोफिया बानो ने अब न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने का मन बना लिया है और साथ ही मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज की है। सामाजिक संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों ने भी पीड़िता के समर्थन में आगे आने की बात कही है।

निष्कर्ष

यह मामला सिर्फ एक महिला के हक की लड़ाई नहीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान है। यदि समय रहते इस मामले में सख्त और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तो यह न्याय व्यवस्था की असफलता मानी जाएगी। सोफिया बानो जैसे नागरिकों को उनका अधिकार दिलाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, और यदि वही चुप्पी साधे बैठा रहेगा, तो आम जनता का सिस्टम पर विश्वास डगमगा जाएगा।

प्रशासन से मांग है कि तत्काल जांच कर विपक्षी के अवैध कब्जे को हटाकर सोफिया बानो को उनका वाजिब हक दिलाया जाए।

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