समाज ने हमेशा मनुष्य को डराया है —
सेक्स से, प्रेम से, और अपनी ही ऊर्जा से।
क्योंकि जिस दिन मनुष्य अपनी ऊर्जा को समझ लेगा,
वह समाज की बनाई हर दीवार तोड़ देगा।
🌿 ओशो कहते हैं —
“सेक्स को तुमने पाप बना दिया,
इसलिए वह तुम्हें कभी आनंद नहीं दे सका।
जिसे तुम छिपाते हो,
वह कभी खिल नहीं सकता।”
सेक्स सिर्फ शरीर नहीं है,
यह उस ऊर्जा का द्वार है
जो यदि जाग जाए,
तो प्रेम, ध्यान और परम चेतना तक ले जा सकती है।
लेकिन समाज ने उस ऊर्जा को दमन किया,
उस पर पर्दे डाले,
और कहा — यह गलत है।
पर याद रखो,
जिसे तुम दबाते हो,
वह कभी समाप्त नहीं होता —
वह भीतर कुंठा बन जाता है,
वह हिंसा, ईर्ष्या और अधूरी इच्छाओं में बदल जाता है।
ओशो समझाते हैं —
“सेक्स से भागना समाधान नहीं है,
उसे समझना ही मुक्ति है।”
जब तुम सेक्स को केवल शरीर की क्रिया नहीं,
बल्कि चेतना की ऊर्जा के रूप में देखना शुरू करते हो,
तब तुम्हारी यात्रा शरीर से आत्मा तक शुरू होती है।
💫 सेक्स तब वासना नहीं रहता,
वह ध्यान बन जाता है।
वह प्रेम की गहराई में उतरने का मार्ग बन जाता है।
समाज ने रोक दिया, क्योंकि समाज को डर है
उस व्यक्ति से जो स्वतंत्र है,
जो अपने भीतर की आग को जानता है,
जो प्रेम और ध्यान की एकता को समझता है।
✨ ओशो कहते हैं —
“सेक्स को समझो, तो वही ध्यान बनता है।
सेक्स को दबाओ, तो वही पागलपन बनता है।”
अब समय है समझने का,
न कि छिपाने का।
क्योंकि समझ ही मुक्ति है।
एस धम्मों सनन्तनो
आचार्य श्री रजनीश



