एक बार की बात है। एक कबूतर एक पेड़ की डाल पर बैठा हुआ था।
नीचे एक बहेलिया छिपकर बैठा था। उसने डाल पर तेल लगा दिया था ताकि कबूतर फिसल जाए और वो उसे पकड़ सके।

बहेलिए ने कबूतर पर तीर तान दिया।
कबूतर ने जब नीचे देखा, तो बहेलिया तैयार था।
वो डर गया और सोचा, “मैं उड़कर ऊपर चला जाऊँ।”

लेकिन जैसे ही उसने ऊपर देखा,
वहाँ एक बाज बैठा था, जो उसे पकड़ने के लिए तैयार था।

अब कबूतर के पास कोई रास्ता नहीं था।
नीचे बहेलिया, ऊपर बाज — अब जाए तो जाए कहाँ?

डर के मारे कबूतर ने आँखें बंद कीं और सच्चे मन से भगवान को याद किया।

“हे भगवान, अब आप ही मेरी रक्षा कर सकते हैं। कृपा करो!”

भगवान ने उसकी सच्ची पुकार सुन ली।

अचानक नीचे से एक साँप निकला और बहेलिए को डस लिया।
बहेलिया घबरा गया। उसी समय उसका चलाया हुआ तीर ऊपर उड़ गया और सीधा बाज को जा लगा।

बाज भी मर गया और बहेलिया भी मर गया।

और इस तरह, भगवान की कृपा से कबूतर की जान बच गई।

शिक्षा:

जब जीवन में कोई रास्ता न बचे, तब घबराने की जगह भगवान को सच्चे मन से याद करें।
भगवान अपने भक्तों की रक्षा ज़रूर करते हैं।
सच्चा विश्वास और प्रार्थना बहुत बलवान होती है।

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