अमृतधारा ब्यूरो चीफ अभय कुमार दीक्षित उन्नाव। नार्मल स्कूल मैदान में पंचम मोक्षदायिनी श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन परमपूज्य संत श्री राम शरण शास्त्री जी महाराज ने गोवर्धन लीला की कथा का बहुत ही सुंदर ढंग से व्याख्यान करते हुए कथा का पौराणिक महत्व समझाया। इंद्र का दम्भ दमन करने के लिए लीलाधरी श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने का संदेश दिया। घमंडी इंद्र ने मूसलाधार वर्षा करनी शुरू कर दी। ब्रजवासियों को वर्षा के कोप से बचाने के लिए कृष्ण ने अपने नख पर गिरिवर धारण कर इंद्र को चेतावनी दी। लगातार सात दिन वर्षा हुयी लेकिन गिरघारी की लीला से ब्रजवासी गिरिराज के नीचे सुरक्षित रहे। इंद्र का घमंड चूर हुआ और वह श्री कृष्ण के सामने नतमस्तक हुआ और कन्हैया ने गिरिराज को स्थापित करते हुए अन्न कूट पूजा के रूप में गोवर्धन पूजा की परंपरा शुरू की। महाराजश्री ने बताया वृन्दावन में जो लोग गिरिराज की परिक्रमा करते हैं उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण होती हैं। कथा परिसर में बड़े आकर्षक ढंग से गोवर्धन पर्वत सजाकर छप्पन भोग लगाया गया। मुख्य यजमान डॉ० संजय मिश्रा, बबली मिश्रा, दिवस यजमान वेंकट मिश्रा व हिमा मिश्रा, ममता द्विवेदी, संयोजक पवन निगम, रश्मि निगम, आशीष निगम, लता निगम, नीरज निगम, सुबोध अस्थाना, डॉ० प्रभात सिन्हा, अखिलेश अवस्थी, वंदना अवस्थी, नीलम त्रिपाठी, मीडिया प्रमुख डॉ मनीष सेंगर, अशोक रस्तोगी, गोलू शुक्ला, अरविंद श्रीवास्तव, राहुल कश्यप, आदि सहित महिला मंडल अध्यक्ष निम्मी अरोड़ा, वेद प्रकाश साहू, अनुराग राठौर ने कथा प्रारम्भ और विश्राम की आरती में भाग लिया। आचार्य शिवम मिश्र ने विशिष्ट जनों का परिचय कराया और वृन्दावन में महाराजश्री द्वारा निर्मित कराए जा रहे दिव्य आश्रम में योगदान के लिए उन्नाव वासियों का आवाहन किया। डॉ मनीष सेंगर और अशोक रस्तोगी ने बताया जो सुधिजन कथास्थल नहीं पहुंच पा रहे वे सनातन परिवार यू ट्यूब चैनल पर कथा का लाइव प्रसारण अपने घर अथवा संस्थान में बैठ कर देख सकते है।

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