दस्तूर दिखावे का अदा नहीं करना
साथ में अपनों के दगा नहीं करना
दौलत ये खुशियों की,रहो बांटते तुम
इन्हें तिजोरी में जमा नहीं करना
इंसानियत ही बस,ऊपर हो सबसे
हक में मज़हब के,दुआ नहीं करना
बना लो आशियाना,किसी के दिल में तुम
हर शाख पर यूं,उड़ा नहीं करना
दूरी न फासला हो,बीच में अब अपने
गलतफहमियों को जिंदा नहीं करना
नहीं है मुमकिन कि,मंजिल तक पहुंचे
अनजान सी राहों पर बढ़ा नहीं करना
Writer sanju shringi kota rajasthan
दैनिक अमृत धारा समाचार पत्र
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