कहानी दरबार में साहित्य प्रेमियों को विद्वान कहानीकारों सुनने का सुअवसर मिला : डॉ. मनमोहन सिंह
कहानी दरबार शब्दों और संवेदनाओं के एक उत्सव की भांति रहा : डॉ. अनीश गर्ग
चण्डीगढ़ : चण्डीगढ़ साहित्य अकादमी (सीएसए) के चेयरमैन डॉ. मनमोहन सिंह एवं वाइस चेयरमैन डॉ. अनीश गर्ग के सानिध्य में आज कहानी दरबार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध लेखक एवं कहानीकार गुलजार सिंह संधू ने की। डा. मनमोहन सिंह ने कहानीकारों का अभिवादन करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि कहानीकार में एक विलक्षण प्रतिभा होती है कि वह अपने आसपास के सभी चरित्र एवं घटनाओं को प्रबुद्धता से देखता है और अपनी कल्पनाशीलता एवं सृजन शक्ति का मिश्रण करके कहानी तैयार करता है। सीएसए का मंच सौभाग्यशाली है कि चंडीगढ़ के साहित्य प्रेमियों को इतने विद्वान कहानीकारों सुनने का सुअवसर मिल रहा है। इन लेखकों की लेखनी ने न केवल साहित्य को समृद्ध किया है बल्कि नयी पीढ़ी को सोचने का नया दृष्टिकोण भी दिया है। अकादमी के सचिव सुभाष भास्कर ने बताया कि
इस कहानी दरबार में सबसे पहले दिल्ली के लेखक केसरा राम ने कोरोना के संक्रमण काल के अनुभव को अपनी कहानी में बखूबी उतारा। बहादुरगढ़ से आए वरिष्ठ कहानीकार ज्ञान प्रकाश विवेक ने अपनी कहानी के पात्र के शहर छोड़ने की वेदना एवं संवेदना को बखूबी पढ़ा। उसके बाद डॉ राजेंद्र कुमार कनौजिया ने अपनी कहानी के माध्यम से घर के मुख्य द्वार को अपनी संवेदना एवं अपने संवाद से जीवंत कर दिया।लेखिका सुनयना जैन ने अपनी अंग्रेजी कहानी ‘द पेशेन्स स्टोन’ में कहानी के मुख्य किरदार की आदर्श आंटी जी के हर विपरीत परिस्थिति में भी धैर्य आत्मविश्वास के साथ एक मजबूत पत्थर की तरह खड़े रहने का जिक्र किया। शायर एवं कहानीकार जितेंदर परवाज़ ने गरीब घर के गरीब बच्चे दीपू की मार्मिक कहानी को रखा जिसमें उसकी टीस है कि उसे रामलीला में लक्ष्मण नहीं बनाया जाता क्योंकि वहां सांभ्रात परिवार के बच्चों को ही प्राथमिकता मिलती रही। फिर अचानक लक्ष्मण का अभिनय करने वाले बच्चे के मना करने पर दीपू को वह रोल मिल जाता है। उपाध्यक्ष डा. अनीश गर्ग ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि आज का कहानी दरबार शब्दों और संवेदनाओं के एक उत्सव की भांति अनुभव हुआ। लेखकों की कहानियों में केवल घटनाएं नहीं बल्कि अनुभवों की जीवंत परछाइयां भी देखने को मिली। इस कार्यक्रम में विशेष तौर पर प्रबुद्ध साहित्यकार जंग बहादुर गोयल, प्रो. अशोक सभ्रवाल,डा. परवीन कुमार, गुल चौहान, बलिजीत, संतोष धीमान, प्रेम विज, डा. हरबंस कौर, दीपक चिनार्थल, अमनदीप सैनी, अश्विनी शांडिल्य, अशोक भंडारी, डा. दलजीत कौर, डा. शशि प्रभा, सुनीत मदान, डा. सुधीर बवेजा उपस्थित रहे।




