जिम्मेवार व संलिप्त लोग

अधिकारियों और मिल मालिकों की मिली भगत से धान घोटाले को अंजाम देकर कीया जाता है करोड़ों का घोटाला

घोटाला करने का तरीका

फर्जी पोर्टल गेट पास व झूठी फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट त्यार करने मे राइस मिल मालिकों व खरीद एजेंसी के अधिकारीयों की होती है सीधी भूमिका

प्रदेश में पिछले कई वर्षों से धान घोटाले के माध्यम से फर्जी खरीद के खेल को अधिकारी और राइस मिल मालिक मिलीभगत कर अंजाम देने का काम करते हैं और प्रदेश में सक्रिय धान माफिया व खरीद एजेंटीयों के अधिकारी मिलीभगत कर करोड़ों रुपए की हेरा फेरी कर सरकार को चूना लगाने का काम करते हैं.

अनाज मंडी में खरीद प्रक्रिया से लेकर राइस मिल में धान पहुंचाने और सरकारी एजेंसी को चावल देने की प्रक्रिया विभाग के अधिकारियों की निगरानी में होती है और उनकी मिलीभगत के बिना इस घोटाले को अंजाम नहीं दिया जा सकता.

अगर धान की खरीद प्रक्रिया की बात करें तो सबसे पहले अनाज मंडी में धान पहुंचने पर उसका गेट पास तैयार किया जाता है और गेट पास के बाद धान संबंधित आढ़ती के पास पहुंचती है जो मंडी इंस्पेक्टर व अन्य अधिकारी धान की चेकिंग के माध्यम से मॉइश्चर और क्वालिटी चेक करते हैं फिर आई फॉर्म व जे फॉर्म तैयार किया जाता है और उसके बाद विभाग के अधिकारियों के निगरानी में धान की भारीई कर उसको मंडी में स्टोर किया जाता है इसके बाद मंडी से विभाग द्वारा नियुक्त किए गए ट्रांसपोर्टर द्वारा उसको राइस मिल में पहुंचाया जाता है जहां राइस मिल इन वर्ड कर उसकी रिसिप्ट वेरीफाई करता है और उसके बाद धान की पेमेंट किसान को होती है

इस प्रक्रिया में मंडी गेट और राइस मिल पर सीसीटीवी कैमरों के साथ-साथ ट्रांसपोर्ट के लिए इस्तेमाल व्हीक

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