*बुद्ध धम्म में मनुष्य केंद्र बिंदु है धम्म मानव की प्रगति एवं कल्याण के चारों तरफ घूमता है इसलिए धम्म मानवतावादी है ।
*दुख और सुख यह मन की अवस्थाएं हैं कहीं बाहर से नहीं स्वयं की उपज है।
*सकारात्मकता से जीवन लंबा होता है नकारात्मकता से जीवन छोटा होता है स्वयं ही समझना है हम किस रास्ते पर चलें।
*जैसे लोहे को कोई अन्य नहीं बल्कि स्वयं की जंग लगने से नष्ट होता है इस प्रकार इंसान को भी कोई अन्य नहीं बल्कि उसके नकारात्मक विचार ही उसे नष्ट कर सकते हैं।

नमो बुद्धाय जय भीम

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