
चण्डीगढ़ : श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 328 स्वरूपों के गायब होने के संबंध में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा प्रशासन को सहयोग न देने के बयान के बाद, सिख सद्भावना दल के प्रमुख और श्री दरबार साहिब के पूर्व कीर्तनिये भाई बलदेव सिंह वडाला, श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार कमेटी के प्रधान भाई सुखजीत सिंह खोसे, किसान नेता भाई बलदेव सिंह सिरसा और अन्य पंथक नेताओं ने आज चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें उन्होंने पूरे दृढ़ विश्वास और स्पष्टता के साथ अपना पक्ष रखा।भाई बलदेव सिंह वडाला ने तथ्यों के आधार पर कहा कि सिख पंथ और आम सिख समाज शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से 328 स्वरूपों के संबंध में यह सवाल पूछता है — कि ये स्वरूप किसके कहने पर, किसे और किस उद्देश्य से दिए गए? और अब वे स्वरूप किन परिस्थितियों में हैं?भाई वडाला ने विस्तार से बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के इन 328 स्वरूपों के संबंध में बनाई गई डॉ. ईशर सिंह कमेटी ने 1100 पन्नों की रिपोर्ट श्री अकाल तख्त साहिब को सौंपी थी। इस रिपोर्ट में विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मामले दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे। इसमें यह भी कहा गया था कि मामला आईपीसी की धाराओं के तहत निपटाया जाए। लेकिन शिरोमणि कमेटी ने विभागीय कार्रवाई के नाम पर दोषियों को केवल नाममात्र की सज़ा दी।इस मामले में न्याय के लिए विभिन्न पंथक संगठनों ने धरने और प्रदर्शन किए। कुछ संगठनों ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के दफ़्तर के सामने धरना भी लगाया। 2020 में शिरोमणि कमेटी की टास्क फोर्स ने इन लोगों पर न केवल अमानवीय अत्याचार किए, बल्कि पुलिस में एफआईआर भी दर्ज करवाईं। उस समय इन्हें श्री अकाल तख्त साहिब के समक्ष क्यों प्रस्तुत नहीं किया गया, जबकि ये लोग स्वयं पंथक थे? भाई वडाला ने कहा कि लगभग साढ़े पाँच वर्ष पहले इस मामले में एफआईआर तब दर्ज करवाई गई थी जब शिरोमणि कमेटी ने उनके द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के न्याय के लिए लिखे गए पत्र का कोई उत्तर नहीं दिया था।सत्कार कमेटी के प्रधान भाई सुखजीत सिंह खोसे ने कहा कि शिरोमणि कमेटी द्वारा एस.आई.टी. को सहयोग न देने का सीधा अर्थ है कि वह लापता स्वरूपों के संबंध में न्याय नहीं होने देना चाहती और दोषियों को हर तरह से बचाना चाहती है। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि “चोर और कुत्ती मिले हुए हैं” — अर्थात शिरोमणि कमेटी और दोषी एक ही हैं। उन्होंने कहा कि शिरोमणि कमेटी में नरेणू महंत की आत्मा समा गई है और ये आज के मसंद गुरु की बेअदबी, सिद्धांतों का अपमान, श्री अकाल तख्त साहिब का दुरुपयोग और गोलक का धन लूट रहे हैं — जिसे कोई भी सिख सहन नहीं करेगा।उन्होंने कहा कि यह पुलिस की दखलअंदाजी नहीं, बल्कि पावन स्वरूपों के न्याय और दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए एक संवैधानिक प्रावधान है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई बार शिरोमणि कमेटी ने विभिन्न घटनाओं में दोषियों पर मुकदमे दर्ज करवाए हैं, तो अब क्यों बचा रही है? असल में यह सब नाटक सतिंदर कोहली को बचाने के लिए किया जा रहा है, जैसा कि ज्ञानी हरप्रीत सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं।भाई बलदेव सिंह वडाला ने श्री अकाल तख्त साहिब की भूमिका पर बोलते हुए कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब की स्थापना सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ने इसलिए की थी ताकि जब दुनियावी अदालतों से लोगों का विश्वास उठ जाए तो यहाँ सब आम और खास को न्याय मिल सके। यहाँ न्याय अकाल पुरख — अर्थात भगवान, अल्लाह या गॉड के भय में रहकर, रब्बी और सिख सिद्धांतों के अधीन दिया जाता है। “उपदेश चहुं वर्णा को सांझा” के सिद्धांत के अधीन यहाँ कोई भी व्यक्ति न्याय की मांग कर सकता है — चाहे वह किसी भी जाति, धर्म या वर्ण का हो।श्री अकाल तख्त के अधीन कार्य करने वाला व्यक्ति केवल अकाल पुरख — अर्थात भगवान, अल्लाह के भय में रहता है, किसी इंसान के डर में नहीं। यहाँ बैठा व्यक्ति किसी विशेष व्यक्ति को लाभ पहुँचाने के लिए काम नहीं करता, चाहे वह कोई राजा-महाराजा ही क्यों न हो। सिख गुरुओं ने सत्ता आम जन के हाथों में सौंप दी थी।इसलिए शिरोमणि कमेटी के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के न्याय के लिए सहयोग देना ज़रूरी है, क्योंकि यह कमेटी अंग्रेज़ी और भारतीय शासन के अधीन बनी हुई संस्था है। अब समय है कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री अकाल तख्त साहिब की सर्वोच्चता को बनाए रखे, सिख गुरु सिद्धांतों की रक्षा करे, और दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए प्रशासन का पूरा सहयोग करे।जारीकर्ता:भाई बलदेव सिंह वडालासिख सद्भावना दल



