सन 1974 अमेरिका के राष्ट्रपति Gerald Ford की पत्नी Betty Ford को स्तन कैंसर का पता चला। सर्जरी तय हुई।
दुनिया के सबसे शक्तिशाली पद पर बैठा व्यक्ति भीतर से काँप गया।
उन्होंने लिखा—
“कैंसर शब्द सुनते ही मैं भीतर तक हिल गया था। मैं स्वयं को असहाय महसूस कर रहा था।”
ऑपरेशन थियेटर के बाहर जाते समय उन्होंने पत्नी का हाथ पकड़ा… हल्के से दबाया… और नम आँखों से कहा—
मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।”
इतना बड़ा राष्ट्राध्यक्ष… इतना सशक्त व्यक्तित्व…
और ये चार शब्द।
बेट्टी की आँखों में भी आँसू आ गए।
कैंसर से ज्यादा भयावह था अकेले पड़ जाने का एहसास।
पर उन चार शब्दों ने उसकी नसों में नया रक्त भर दिया।
सर्जरी सफल हुई।
कुछ ही दिनों में वह व्हाइट हाउस लौट आई।
प्रेम का चौथा आयाम
प्रेम केवल “आई लव यू” नहीं है।
प्रेम का एक और गहरा रूप है
मैं तुम्हारे बिना अधूरा हूँ।”
यह वाक्य कमजोरी नहीं है।
यह स्वीकार है।
यह भरोसा है।
यह साझेदारी है।
एक और दृश्य
एक अस्पताल के आईसीयू में 85 वर्षीय वृद्ध भर्ती थे।
इलाज असर नहीं कर रहा था।
डॉक्टरों ने मिलने की अनुमति नहीं दी।
पत्नी ने आग्रह किया—
“डॉक्टर साहब, मुझे इनके पास बैठने दें। ये मुझे अपने पास पाएंगे तो लड़ पाएंगे।”
अनुमति मिली।
वह पास बैठी… हाथ थामा… कुछ नहीं बोली।
कुछ दिनों में दवाइयाँ असर करने लगीं।
घर लौटते समय वृद्ध ने पत्नी से कहा— तुम साथ नहीं होतीं तो मैं यह लड़ाई हार जाता…
मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।”
और उस दिन उनकी आँखों में जो कृतज्ञता थी—
वह किसी औषधि से बड़ी थी।
आज का दाम्पत्य संकट
आज नवविवाहित जोड़े प्रेम करते हैं,
पर स्वीकार नहीं करते।
वे साथ रहते हैं,
पर एक-दूसरे को “ज़रूरत” नहीं बनने देते।
रिश्ते आजकल प्रेम से नहीं,
अहंकार की कसौटी पर परखे जाते हैं।
“पहले वो बोले…”
“मैं क्यों झुकूँ?”
“कमज़ोर मत दिखो…”
यहीं ऑक्सीजन कम पड़ जाती है।
रिश्तों की ऑक्सीजन क्या है?
*समय पर कहा गया धन्यवाद
*सार्वजनिक रूप से दिया गया सम्मान
*कठिन समय में पकड़ा गया हाथ
और…
चार शब्द—” *मुझे तुम्हारी ज़रूरत है*।”
जिस दिन पति पत्नी से यह कह देता है,
उस दिन प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाती है।
जिस दिन पत्नी पति से यह स्वीकार कर लेती है,
उस दिन शिकायत कम हो जाती है।
क्योंकि ज़रूरत का एहसास
अधिकार से बड़ा होता है।
*युवाओं के लिए पाँच सूत्र*
- सप्ताह में एक दिन 30 मिनट “नो मोबाइल संवाद”।
- झगड़े में कहें— “हम समस्या के खिलाफ हैं, एक-दूसरे के नहीं।”
- सार्वजनिक मंच पर एक-दूसरे की प्रशंसा करें।
- माता-पिता के सामने सम्मानजनक व्यवहार रखें।
- कभी-कभी हार जाना भी रिश्ते की जीत होती है।
अंतिम सत्य
हम सबको अच्छा लगता है यह सुनकर—कि कोई हमें चाहता है।
पर उससे भी अधिक अच्छा लगता है—जब कोई कहता है,
“मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।”
यही शब्द रक्तसंचार को तेज रखते हैं।
यही शब्द जीवन को उद्देश्य देते हैं।
यही शब्द रिश्तों की ऑक्सीजन हैं।
प्रेम जताने से छोटा नहीं होता,
न जताने से सूख जाता है।
यदि सच में हमें कोई प्रिय है—
तो आज ही कह दीजिए।
क्योंकि कई रिश्ते टूटते नहीं,
बस दम घुटने से चुपचाप मर जाते हैं।
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