Uncategorized
1 min read
30

शेरनी

January 19, 2026
0
शेरनी

जिस शेरनी ने अंग्रेजों की छाती में गोलियां 🔫 दागीं, वो आज़ादी के बाद सड़कों पर लावारिस मर गई! आज ये पोस्ट पढ़ते समय शायद आपकी रूह कांप जाए।

आज हम उन ‘फर्जी’ हीरो-हीरोइनों के पीछे पागल हैं जो परदे पर एक्टिंग करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं उस “अग्नि-कन्या” को जिसने साक्षात मौत की आंखों में आंखें डालकर गोली चलाई थी?

​बात है 1932 की… बंगाल का गवर्नर स्टैनली जैक्सन, जिसके नाम से बड़े-बड़े सूरमा कांपते थे। कलकत्ता यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में वह सीना तानकर खड़ा था। उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि सामने बैठी एक 21 साल की दुबली-पतली लड़की, बीणा दास, अपनी साड़ी के पल्लू में मौत (रिवॉल्वर) छुपाकर लाई है।

​जैसे ही गवर्नर भाषण देने उठा, सन्नाटा चीरती हुई गोलियों की आवाज़ आई— ठायं! ठायं! ठायं!🔫

​पूरा हॉल दहल गया! अंग्रेज सिपाही अपनी जान बचाकर छिपने लगे। बीणा दास ने एक नहीं, दो नहीं, पांच गोलियां दागीं। वो तो गवर्नर की किस्मत अच्छी थी कि वह झुक गया, वरना उस दिन इतिहास कुछ और होता।
​गिरफ्तारी के बाद जो हुआ, वो सुनकर आपका खून खौल उठेगा!

अंग्रेजों ने उन्हें जेल में ठूंस दिया, अमानवीय यातनाएं दीं, अंधेरी कोठरी में रखा। लेकिन उस शेरनी ने कोर्ट में खड़े होकर गरजते हुए कहा— “हाँ, मैंने गोली🔫 चलाई! क्योंकि मैं अपने देश की बेड़ियों को अब और नहीं देख सकती!”

​अब आता है सबसे कड़वा सच (जिसे सुनकर आपकी आंखों में आंसू आ जाएंगे)
जिस आज़ादी के लिए बीणा दास ने अपनी जवानी कुर्बान कर दी, आज़ादी के बाद इस देश ने उन्हें क्या दिया? “गुमनामी और गरीबी!”

​अपने आखिरी दिनों में वह ऋषिकेश की सड़कों पर एक लावारिस की तरह घूमती रहीं। उनके पास दो वक्त की रोटी के पैसे नहीं थे। जब उनकी मृत्यु हुई, तो उनकी लाश सड़क के किनारे सड़ी-गली हालत में मिली। राहगीरों को पता तक नहीं था कि यह वही शेरनी है जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की चूलें हिला दी थीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts