“एक बार की बात है , एक दोस्त ने दोस्त को फोन किया कि मां की दवाइयां खत्म हो गई है। कुछ पैसे चाहिए।” दोस्त बोला ” तू फिक्र मत कर। कौन-कौन सी दवा है जरा नाम बताना, और सुन शाम को जब मेडिकल स्टोर पर दवा लाने जाए तब मुझे फोन कर देना।”

“शाम को जब उसने मेडिकल स्टोर पर पहुंच कर फोन मिलाया तो दोस्त का फोन स्विच ऑफ आ रहा था।” वह घबरा गया। क्योंकि दवाई बहुत जरूरी थी। और दोस्त तो दगा दे गया था।,

” वह वापस घर आया तो देखा मां के पास दवाइयां रखी हुई थी। उसने मां से पूछा तो मां बोली ,” तुम्हारा दोस्त आया था। वहीं ये दवाइयां रख गया है। वह दौड़ता हुआ दोस्त के घर गया। पूछा ये क्या बात है मुझे फोन करने की कह कर फोन स्विच ऑफ कर लिया और दवाइयां खुद खरीद लाया।?”

“दोस्त बोला ” भाई सच बात तो ये है कि आज पैसे मेरे पास भी नहीं थे। इसलिए मैं मोबाइल बेच आया मां की दवा के लिए। मोबाइल और आ जाएगा। मगर मां चली जाती तो कैसे आती।” उसने भरी आंखों से दोस्त को गले लगा लिया और बोला ” साले, तेरे होते मुझे और मां को कुछ हो सकता है क्या?”!(NA)!

:- किसी ने सच ही कहा है कि फिक्र कर दिखा मत.. कदर कर जता मत ..तू चाहता है कि दोस्ती बनी रहे …तो मोहब्बत कर बता मत यही तो है सच्ची दोस्ती सच्चा प्यार !🌹❤
आपको हमारी यह छोटी सी स्टोरी कैसी लगी जरूर बताएं और अपने दोस्तों को भी शेयर करें..🙏

💕आपकी अपनी #Neha💕

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