पेड़ ही जीवन है l

जब मेरी निगाह पड़ी एक पेड़ के नीचे । वो बैठी कान सहलती पेड़ के नीचे । लाचारी से भरी निगाहें देखती । एक टक पेड़ को ऊपर नीचे । पर उसकी किस्मत में कहाँ था बैठना । इस पेड़ के नीचे । तभी एक गाड़ी और खड़ी हो गई । इस पेड़ के नीचे । उसमें से उतरे कुछ मानुष नीचे । लेकर हाथ में कुल्हाड़ा आरी । काटने लगे वो पेड़ की जड़ में नीचे । तो बताओ वो कैसे बैठती उस पेड़ के नीचे । पेड़ लगाओ पेड़ बचाओ ।। लेखक ( उमेश राजौरिया ) फोन- 8383064929

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