लगभग 25 साल पुराने हत्या के मामले ने हत्या के मामला को बदला गैर इरादतन मे किया बरी और रिहा
बुजुर्ग ने अपनी बेटी के प्रेमी को अपनी रक्षा करते हुए मारा

करनाल ,30 जनवरी (शैलेन्द्र जैन )पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने करीब ढाई दशक पुराने एक मामले में 94 वर्षीय व्यक्ति को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने हत्या के दोष से मुक्त करते हुए मामले को गैर इरादतन हत्या की कैटेगिरी में माना और सजा को आरोपी द्वारा पहले ही जेल में बिताए गए समय तक सीमित कर दिया। कोर्ट ने फैसले में आरोपी की अत्यधिक वृद्धावस्था, लंबी न्यायिक प्रक्रिया और पहले से काटी सजा को अहम आधार बनाया।
मामला करनाल से जुड़ा है। आरोप के अनुसार, करनाल के स्वर्ण सिंह को अपनी बेटी के कथित अवैध संबंधों को लेकर संदेह था। इसी को लेकर दिसंबर 2000 में विवाद बढ़ गया। इस दौरान हाथापाई हुई और आरोप है कि स्वर्ण सिंह ने कथित प्रेमी पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया और निचली अदालत ने उसे दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट में सुनवाई और अहम टिप्पणी
मामले की सुनवाई पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जस्टिस एनएस शेखावत और जस्टिस एचएस ग्रेवाल की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने केस के तथ्यों और परिस्थितियों का गहराई सेकी। कोर्ट ने केस के तथ्यों और परिस्थितियों का गहराई से विश्लेषण किया। कोर्ट ने माना कि यह मामला सुनियोजित हत्या का नहीं, बल्कि गैर इरादतन हत्या का बनता है। फैसले में कहा गया कि घटना अचानक हुई हाथापाई के दौरान हुई और इसमें हत्या का स्पष्ट इरादा साबित नहीं होता।
जुर्माने की राशि में नहीं बदलाव
कोर्ट ने अपीलकर्ता की उम्र, स्वास्थ्य और जेल में बिताए गए समय को देखते हुए सजा में बड़ा संशोधन

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