26 सितंबर (नरेन्द्र बंसल)बाबा बंदा सिंह बहादुर स्टेडियम में शक्ति नाटक क्लब द्वारा आयोजित रामलीला महोत्सव के चौथे दिन सीता स्वयंवर का मंचन किया गया। मंचन में भगवान राम, लक्ष्मण और मुनि विश्वामित्र के जनकपुरी आगमन से लेकर धनुष तोड़ने तक की घटनाओं को प्रस्तुत किया गया। चौथे दिन रामलीला मंचन का शुभारंभ अरोड़वंश महासभा के अध्यक्ष राजपाल ग्रोवर द्वारा किया गयाइस दौरान सभा सदस्य एडवोकेट सतपाल सेठी,बिटटू मोंगा, हैप्पी सेठी,रंजीत बिटु,राजू अरोड़ा,मोहन कुमार,सब्ज़ी मंडी से नरेश कक्कड़,संजय बतरा,रजिंदर बतरा पपू,गुलशन ग्रोवर,मनोज सरदाना ,काली माता मंदिर कमेटी के चेयरमैन प्रहलाद मित्तल, प्रधान श्यामलाल बंसल ,विनोद बंसल पूर्व पार्षद ,मनोज गर्ग , दीपू सिंगला सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे वहीं चौथे दिन के मंचन में दिखाया गया कि राक्षसों का वध करने के बाद गुरु विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को जनकपुरी लेकर आते हैं, जहां राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता का स्वयंवर रचा है। शर्त होती है कि जो शिव के धनुष को तोड़ेगा, वही सीता से विवाह कर सकेगा। कई राजाओं के असफल प्रयासों के बाद राजा जनक व्यथित होजाते हैं और सभा को खाली करने का आदेश दे देते हैं।इस दृश्य में लक्ष्मण और राजा जनक के बीच संवाद ने दर्शकों को खूब रोमांचित किया। राम के समझाने पर लक्ष्मण शांत होते हैं। इसके बाद गुरु विश्वामित्र के कहने पर श्रीराम धनुष उठाकर तोड़ देते हैं और सीता उन्हें वरमाला पहनाती हैं। धनुष टूटते ही क्रोधित होकर भगवान परशुराम प्रकट होते हैं और राम से उनका संवाद तथा लक्ष्मण के कटाक्षों ने पूरे पंडाल में उत्साह भर दिया। जनकपुरी में सीता माता के विदाई के साथ ही रामलीला का चौथा दिन संपन्न हुआ चौथे दिन के समापन पर शक्ति नाटक क्लब के प्रधान राजेश सेतिया,अंशुल बतरा, बॉबी मिढा रवि, ,सचिन ललित,अनिल,हरबंस खन्ना, करनैल सिंह ,दीपू चिलाना,केतन मेहतासहित अन्य सदस्यों ने मुख्य अतिथि व अन्य विशिष्ट अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी कियाफोटो l

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