दैनिक अमृत धारा कैथल 9 अक्टूबर(सुरेंद्र चौधरी) जहां पर विद्यालयों को शिक्षा का मंदिर माना जाता है वहां पर शिक्षा देने वाले अध्यापकों को गुरु का दर्जा दिया जाता है लेकिन उन्हीं विद्यालय में आजकल वही गुरु विद्यालय में लाखों रुपए का घोटाला करने से नहीं चूकते ऐसा ही एक मामला कैथल जिले के गांव दयौरा के प्राइमरी स्कूल में उजागर हुआ है 19 जुलाई 2024 को स्कूल में 48 लाख 31 हजार के करीब ग्रांट स्कूल के खाते में आई खाते में आई जिसमें स्कूल के टीचर रामेश्वर ने बाउंड्री वॉल और रिटर्न वॉल अन्य कई कार्यो में 48 लाख से अधिक ग्रांट खर्च कर दी गांव के युवा गुरप्रीत और सुनील कुमार ने आरोप लगाते हुए कहा है की प्रधानाचार्य द्वारा स्कूल में बहुत बड़ा घोटाला किया गया है जो कार्य किए गए हैं स्कूल में इन पर तकरीबन 15 लाख रुपए ही खर्च हुआ है जिसमें से 33 लाख से अधिक का घोटाला टीचर और स्कूल की एसएमएस कमेटी ने मिलकर किया है ग्रामीण नेयह भी आरोप लगाए हैं कि रामेश्वर ने बिल पास होने से पहले ही स्कूल के खाते से पैसे निकाल लिए थे जब टीचर रामेश्वर को इस बात की जानकारी मिली कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होने वाली है तो वह अपनी बदली करवा कर वहां से चले गए जब इस मामले की सारी जानकारी
सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल इंदु गुप्ता से गई तो उन्होंने कहा कि मुझे विद्यालय में कराऐ हुए कार्यों में घोटाला नजर आ रहा था जिस कारण मैंने कुछ बिल पास पास करने से रोक दिए हैं जिन्हें अभी पास नहीं किया गया और रामेश्वर दास को बोला गया है कि पहले इन बिलों की जांच कराई जाएगी विकास कार्यों की जांच होगी उसके बाद ही बिल पास किए जाएंगे ग्रामीण और प्रधानाचार्य इन्दु गुप्ता ने मांग की है की जिला प्रशासन सभी विकास कार्यों की गहराई से जांच करें अगर जांच में कोई बड़ा घोटाला पाया जाता है तो टीचर रामेश्वर दास और स्कूल की कमेटी के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए जब इस संबंध में टीचर रामेश्वर से बातचीत की गई तो उन्होंने आरोपों को नकारते हुए कहां कि मेरे समय में जो 48 लाख 31 हजार रुपए के करीब ग्रांट आई थी वह सारे पैसे स्कूल के विकास कार्य पर लगा दिए गए हैं जिसमें से करीब 160 रुपए बचे थे वह मैं स्कूल के खाते में वापस जमा कर दिए हैं ग्रामीण और प्रधानाचार्य रंजिश रखते हुए झूठे मेरे ऊपर लगा रहे हैं उन्होंने कहां कि जो बिल अभी पास होने बाकी है उनको प्रधानाचार्य ने कैंसिल कर दिया था और यह कहां गया था कि जब तक सारे विकास कार्य की जांच नहीं होगी तब तक बिल पास नहीं किए जाएंगे अब देखना यह है कि जिला प्रशासन स्कूल में हुए विकास कार्यों में कितनी कार्रवाई करता है अगर स्कूल में कोई घोटाला बड़ा हुआ है तो टीचर और कमेटी के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है



