समालखा में धूमधाम से मनाई गई वाल्मीकि जयंती। समालखा (राकेश वर्मा)वीरवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष में शहर भर में धूमधाम से शोभायात्रा निकाली गई जो कि वाल्मीकि मंदिर से शुरू होकर रेलवे रोड से निकाली गई। जिसमें मुख्य अतिथि के तौर पर विधायक मनमोहन सिंह भडाना पहुंचे। जिनका आयोजको द्वारा फूल माला पहनकर जोरदार स्वागत किया गया। विधायक ने मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हमें संत महात्माओं दी हुई शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिए और उनके बताए हुए मार्ग पर चलकर अपना जीवन सफल बनाना चाहिए। वही शोभा यात्रा में सुंदर-सुंदर झांकियां व बैंड बाजा के साथ निकाली गई, जिसको देखकर शहरवासी शोभायात्रा की प्रशंसा कर रहे थे। इस मौके पर प्रमुख समाजसेवी सुभाष कुहाड़, राकेश सैनी, राकेश, सुमित लाहोट, संजय, पवन सहित सैकड़ो की संख्या में वाल्मीकि समाज के लोग मौजूद थे। —–//——–/—-/———–/सुहागिनों ने उत्साह से मनाया करवा चौथ का पर्व। समालखा (राकेश वर्मा)शुक्रवार को सुहागानों ने करवा चौथ का पर्व बड़े उत्साह से मनाया। पर्व को लेकर महिलाओं ने बाजार में कई दिन पहले ही खरीदारी शुरू कर दी थी, वही इस बार मेहंदी लगवाने को लेकर महिलाओं में काफी चाह दिखा और देर रात्रि तक मेहंदी लगाने वाले कारीगरों के पास महिलाओं की भीड़ लगी रही। सुहागिनों ने सुबह ही उपवास रख कर मंदिरो में पूजा पाठ की ओर दोपहर को महिलाओं के समूह में बैठकर कहानी सुनी व अपने पति की लंबी आयु की कामना कर, घर की बड़ी औरतों को उपहार भेंट किये। वही चांद निकलने के बाद चांद को देखकर अपने पति के हाथों से जल ग्रहण कर उपवास खोला और उनकी पूजा करके उनसे आशीर्वाद लिया। ————–/—————/78वें वार्षिक निरंकारी संत समागम की तैयारियाँ व्यापक स्तर पर। समागम की तैयारी को लेकर श्रद्धालु दिन-रात कर रहे है  सेवा ।समालखा(राकेश वर्मा) संत निरंकारी मिशन का 78वां वार्षिक संत समागम, पूर्ववर्ती वर्षों की दिव्यता और गरिमा के अनुरूप, इस वर्ष भी 31 अक्टूबर से 3 नवम्बर, 2025 तक समालखा स्थित संत निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर अत्यंत भव्यता, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास के साथ आयोजित होने जा रहा है। यह दिव्य आयोजन सतगुरु माता सुदीक्षा  महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा, जिसकी शुभ सूचना ने समस्त श्रद्धालु भक्तों के हृदयों में अपार हर्ष और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया है। उत्सव की तैयारियाँ अत्यंत श्रद्धा, लगन एवं निःस्वार्थ भावना से की जा रही हैं। श्रद्धालु भक्त, चाहे वे वृद्ध हों या युवा, पुरुष हों या महिलाएं, हर पृष्ठभूमि के भक्त सेवा में पूर्ण रूप से रत हैं। प्रातः काल की प्रथम किरण से लेकर संध्या के अंतिम प्रकाश तक, हर ओर भक्ति भाव से समर्पित सेवा का अपूर्व आलोक दिखाई देता है। कोई मिट्टी के तसले ढो रहा है, कोई शामियाने गाढ़ रहा है, तो कोई सफाई, जल प्रबंधन या भोजन व्यवस्था में जुटा है। 78वें वार्षिक संत समागम की भव्यता को प्रकट करता हुआ मुख्य गेट भी आकार लेने लगा है – एक ऐसा प्रवेश-द्वार, जो प्रेम, समरसता और आत्मिक एकत्व की यात्रा का प्रतीक बनेगा।’ यह सब कुछ समर्पण की उस भावना का प्रमाण है, जो सतगुरु के ज्ञान से उत्पन्न होती है। जिस प्रकार कहा भी गया है कि ‘जहाँ सेवा में समर्पण जुड़ जाता है, वहीं हर क्षण उत्सव बन जाता है।’सेवा भाव की गरिमा को देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि इन सेवकों के मुखमंडलों पर कोई थकान नहीं।देश के कोने-कोने से ही नहीं, अपितु विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु भक्त इस संत समागम में सम्मिलित होने के लिए पधारते हैं। उनके स्वागत एवं सुविधाओं हेतु सभी आवश्यक प्रबंध अत्यंत सुचारू रूप से किए जा रहे हैं। रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और हवाई अड्डों पर निरंकारी सेवादल के अनुशासित, मर्यादित एवं सुसज्जित सेवादार अपनी नीली और खाकी वर्दियों में श्रद्धालुओं का हार्दिक अभिनंदन करते हुए उन्हें उनके निर्धारित निवास स्थलों तक पहुँचाने हेतु तैयार रहते है ———–  /—-/////

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