चण्डीगढ़ : कार्तिक मास के पावन अवसर पर श्रीराम मंदिर, सेक्टर 47 में जगत सद्भावना संस्थान के सानिध्य में आयोजित पितृ तर्पण श्रीमद्भागवत कथा भक्ति ज्ञान यज्ञ के विश्राम दिवस में सद्भावना दूत भगवताचार्य स्वामी डॉ रमनीक कृष्ण जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उद्धव को ज्ञानोपदेश प्रसंग श्रवण कराते हुए बताया कि संसार की समस्त आसक्तियां सत्संग से नष्ट हो जाती हैं। सत्संग से जैसे मैं वश में होता हूं, वैसा साधन, योग, सांख्य, धर्म पालन या स्वाध्याय से नहीं होता। यही नहीं, व्रत, यज्ञ, वेद, तीर्थ, यम-नियम भी सत्संग के समान मुझे आश्रित नहीं कर सकते। सत्संग केवल इस युग में ही नहीं, सभी युगों में प्रभावी रहा है और रहेगा। रजोगुणी प्रकृति के जीवों ने भी मुझे इसके प्रभाव से प्राप्त किया है। सत्संग के कारण ही मुझे दैत्य, राक्षस, पशु, गंधर्व, अप्सरा, नाग, सिद्ध, विद्याधर, मनुष्य प्राप्त कर लेते है।वृत्रासुर, प्रहलाद, बलि, बाणासुर, विभीषण, हनुमान, जामवंत, सुग्रीव, गजेंद्र, जटायु, कब्जा ब्रज गोपियां, यज्ञ पत्नियों ने सत्संग के प्रभाव से मुझे प्राप्त किया। इन लोगों ने न तो वेदों का अभ्यास किया, ना ही कोई योग्यता,, न तपस्या ही की, केवल सत्संग के प्रभाव से मुझे प्राप्त हो गए। उद्धव, बड़े-बड़े प्रयत्नशील साधक योग, सांख्य, दान, व्रत, तपस्या, यज्ञ, स्वाध्याय, संन्यास साधनों आदि के द्वारा मुझे प्राप्त नहीं कर सकते, किंतु सत्संग के द्वारा साधारण जाति की शबरी, और अति वैभवशाली विदुर ने मुझे अपने वश में कर लिया।

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