खून का सबसे दुर्लभ रूप वह है जिसमें जीवन बचाने की क्षमता किसी भी सामान्य रक्त से कहीं अधिक हो—इसे ही गोल्डन ब्लड, यानी Rh-null कहा जाता है। दुनिया में ऐसे लोगों की संख्या 50 से भी कम है।
इस ब्लड में Rh सिस्टम के 61 प्रोटीन में से एक भी मौजूद नहीं होता। यही वजह है कि इसे सोने से भी ज्यादा कीमती माना जाता है, क्योंकि यह उन मरीजों को बचा सकता है जिनका ब्लड किसी और से मैच नहीं होता।
वैज्ञानिक अब लैब में इसी तरह का रक्त बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि इतने दुर्लभ डोनर हमेशा उपलब्ध नहीं होते, और कई बार मरीज का जीवन केवल इसी ब्लड पर निर्भर रहता है।
यदि भविष्य में Rh-null को स्टेम-सेल और जीन-एडिटिंग तकनीक से तैयार किया जा सका, तो यह चिकित्सा जगत में एक नया अध्याय खोल देगा।
s k girdhar editor Dainik Amrit Dhara samachar ptr
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