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दुनिया जिस रफ़्तार से बदल रही है, उसमें यात्रा का भविष्य अब हाइपरलूप टेक्नोलॉजी के हाथ में है। भारत भी इस दौड़ में पीछे नहीं है।
Hyperloop एक ऐसी प्रणाली है जिसमें यात्रियों को एक कम-प्रेशर ट्यूब में चलने वाले कैप्सूल के अंदर बैठाकर हवा के प्रतिरोध को लगभग खत्म कर दिया जाता है, जिससे स्पीड 1,000 किमी/घंटा से भी ऊपर पहुँच सकती है।
अगर यह तकनीक भारत में पूरी तरह लागू होती है, तो मुंबई–पुणे जैसे रूट पर जहाँ अभी 3 घंटे लगते हैं, हाइपरलूप से यह समय सिर्फ 20–25 मिनट रह जाएगा।
यह सिर्फ तेज़ी की बात नहीं Hyperloop ऊर्जा की खपत भी कम करता है क्योंकि इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक लिफ्टिंग इस्तेमाल होती है, जिससे कैप्सूल हवा में तैरता है और रगड़ (friction) लगभग खत्म हो जाती है।
भारत सरकार और कई वैश्विक कंपनियाँ इस तकनीक को टेस्ट करने पर काम कर रही हैं। अगर अगले कुछ वर्षों में यह मंज़िल तक पहुँच जाती है, तो यह न केवल ट्रैवल टाइम घटाएगी बल्कि शहरों के बीच के व्यापार, नौकरी और लाइफ़स्टाइल को भी नई दिशा देगी।
Hyperloop को कई लोग “21वीं सदी का बुलेट ट्रेन वर्ज़न” मानते हैं तेज़, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल। अगर सब कुछ प्लान के अनुसार चला, तो आने वाला वक्त भारत को दुनिया के सबसे तेज़ परिवहन देशों की कतार में खड़ा कर सकता है।



