पांच बच्चों की माँए पति और बच्चों को छोड़कर दूसरी शादियाँ कर रही है। शादीसुदा मर्द घर से बाहर प्यार ढुंढ रहे है जवान बच्चे रोज पार्टनर बदल रहे है। शादियाँ जरा भी नही टिक रही। किशोर बच्चे भी डिप्रेशन मे है। लोग जरा से सुख के लिए मर्यादाएं लांघ रहे है। सबको सोसल मीडिया ने भटकन मे डाल दिया। सब दौड़ दौड़ कर भरपूर जीने की चाह मे अपना सुखचैन खोते जा रहे है। याद रखिये भटकना सच्चा सुख नहीं है इसलिए इस मक्कड जाल में फंस कर अपना जीवन खराब मत करो। अपने जीवनसाथी पर भरोसा करो। और भरोसा दिलाओ। जीवन का सच्चा आनंद किसी एक के साथ ठहर जाने मे है। वक्त और खराब आने वाला है। अपने हमसफर का हाथ कस कर पकड़ लो। जो प्राप्त है वही पर्याप्त है। बाकी कितने भी जतन कर लो तृष्णा कभी खत्म नही होगी। भटककर बेहतर की तलाश मे बेहतरीन को खो दोगे

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