साल भर जिस पर्व का रहता हमें बेसब्री से इंतजार हैं! आ गया वह पावन छठ त्यौहार है!
नदी तालाब की चल रही जोड़ो से सफाई है!
लोगों ने सुंदर पावन घाट सजाई है!
घाट-घाट के पथ पर रोशनी जगमगाई है!
हर्ष और उल्लास चहूं ओर छाई है!
जिसे देख दुनिया सारी हर्षाई है!
बरसों बाद आज फिर इस पावन पर्व पर हम सब एकजुट हुए हैं!
देश-विदेश से भी इसबार लोग आ मिले हैं!
दिल से दिल के तार आज फिर से जुड़े हैं!
अपने-पराए सभी आन मिलें हैं,
श्रद्धा सुमन के फूल खिले हैं!
चारों तरफ बाजार-हाट सजे हैं!
ढोल नगाड़े सभी बजा रहे हैं!
छठी मैया का गुणगान सभी गा रहे हैं!
रंग बिरंगी लाइटों से देखो पथ सजा है!
गुब्बारे और रंग-बिरंगे खिलौने देख बच्चों का मन ललच रहा है!
छठ के पावन अवसर पर
सभी अपनों को एकजुट देख,
मन बाग-बाग हो गया हैं।
माधुरी राठौड़✍️
जमशेदपुर (झारखंड)
(स्वरचित रचना)



