इस्माईलाबाद दैनिक अमृतधारा (विजय वधवा)
गांव भूस्थला के जिस स्कूल में 71 साल पहले बचपन में किलकारियां मारते थे जब वहां सभी दोस्त अब जमा हुए तो सभी के चेहरे पर चमक देखने लायक थी। सभी ने जमकर ठहाके लगाए और भंगड़ा पाया । यही नहीं जीवन के खट्टे मीठे अनुभव साझा किए। सभी ने लालटेन से मोबाइल युग तक के सफर को अपनी अपनी जुबानी पेश किया। शमा था भूस्थला गांव के सरकारी स्कूल में 1952, 1961, 1974 के बैच मेट के मिलन समारोह का आयोजन किया गया।
इस समारोह का आयोजन करनाल के के पी अग्रवाल ने गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में किया। जिसमें मुख्यातिथि के रूप में स्कूल के पूर्व मुख्याध्यापक हंस राज ने शिरकत की। आयोजक कुल प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि भविष्य में अगर यही कार्यक्रम हुआ तो उसका नाम गांव की बेटी मिलन समारोह के नाम से होगा।इस स्कूल से आठवीं पास करने वाले राजेंद्र प्रसाद ने बताया कैसे कांधे पर थैला लटका कर आते थे। कैसे मास्टर का डर और पिता का भय रहता था। घर में माता पिता और स्कूल में गुरूजन का आदर अलग ही स्थान रखता था। उस समय पांच और दस पैसे ही बड़ी रकम थी। कुल प्रकाश अग्रवाल और राजिंदर भट्टी ने बताया कि उस पढ़ाई का कोई मुकाबला नहीं था। अधिकांश मित्र मंडली आज बैंकों से रिटायर है। राजिंदर अग्रवाल कहते हैं कि उस समय की बैठकें, गपशप, सुख दुख साझा करने का दौर एक यादगार ही बन गया है। प्रदीप सिंह ने बताया कि दोस्तों की बारात का आनंद ही अलग होता था। बिन पैसे की ढेरों खुशियां थी। बेबाक जीवन और मस्त समय था। इस मौके पर बैच मेट ने ढोल की थाप पर नाच कर खुशी को साझा किया। कार्यक्रम वंदे मातरम् से आरंभ हो कर राष्ट्रगान पर समाप्त हुआ। इस मौके ईश्वर राणा, अशोक तंवर,बलबीर राणा,राजबीर, विक्रम राणा,महाबीर,बलबीर तंवर, सोमपाल तंवर,तेजवीर सिंह व स्कूल की प्रिंसिपल सविता ग्रेवाल,रमेश गर्ग आदि मौजूद रहे।
फोटो सहित

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