आज अगर आपके पास Fortuner है,
तो मुमकिन है आपके बेटे के पास Defender हो,
और आपके पोते के पास फिर से Maruti 800।
क्योंकि वेल्थ ज़्यादातर
तीन पीढ़ियों तक ही टिकती है—
इस पर बड़ी-बड़ी रिसर्च हो चुकी है।
पहली पीढ़ी होती है Wealth Creators।
इन्होंने पैसों की कमी देखी होती है,
कड़ी मेहनत की होती है,
और हर एक रुपए की कीमत जानते हैं।
आप इन्हें कभी पैसे उड़ाते या
बेवजह पार्टी करते नहीं देखेंगे।
यही हमारे पिता या दादा होते हैं।
दूसरी पीढ़ी होती है Wealth Managers।
इन्होंने अपने बड़ों का संघर्ष देखा होता है,
इसलिए पैसों की कद्र इन्हें भी होती है।
जैसे धीरूभाई अंबानी ने साम्राज्य खड़ा किया,
और अगली पीढ़ी ने उसे कई गुना आगे बढ़ाया।
इसलिए बेटा Defender तक पहुँचता है।
लेकिन असली दिक्कत आती है
तीसरी पीढ़ी में।
जब ये पैदा होते हैं,
तो लग्ज़री इनके सामने पहले से रखी होती है।
पैसे की कोई कमी नहीं,
तो उसकी कीमत भी नहीं।
यही वजह है कि क्लब, पार्टियाँ,
महंगी घड़ियाँ और दिखावा—
अक्सर तीसरी पीढ़ी में ही दिखता है।
जिन्होंने कभी कमी नहीं देखी,
वो पैसे की कद्र कैसे करेंगे?
और फिर धीरे-धीरे
वो सारी कमाई खत्म हो जाती है
जो किसी ने ज़िंदगी लगाकर बनाई होती है।



