गुहला-चीका : 23 दिसम्बर/ दैनिक अमृत धारा/ हुकम सिंह मैहला, वधावन
गुहला-चीका क्षेत्र के खुशहाल माजरा गांव में राइस मिलों से फैल रहे प्रदूषण ने हालात को भयावह बना दिया है। गांव में लगातार बढ़ रही गंभीर बीमारियों की शिकायतों के बाद आज स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर-घर जाकर जांच की, जिसमें टीबी, पीलिया, त्वचा रोग और कैंसर के मरीज सामने आए हैं। साथ ही पानी की जांच के लिए लिए गए 10 सैंपलों में से 9 सैंपल प्राथमिक जांच में फेल पाए गए, जिससे गांव में पेयजल संकट और गंभीर स्वास्थ्य खतरे की पुष्टि हो गई है।
घर-घर जांच में उजागर हुआ स्वास्थ्य संकट
स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने गांव के प्रत्येक मोहल्ले में जाकर लोगों की जांच की। इस दौरान कई परिवार ऐसे मिले, जहां एक से अधिक सदस्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय से बच्चों में कमजोरी, सांस की बीमारी, पेट के रोग और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, जबकि कैंसर के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं।
डॉक्टर ने माना – गंदा पानी और दूषित हवा बन रही है बीमारी की वजह
स्वास्थ्य विभाग के मेडिकल अफसर डॉ. अमन बंसल ने बताया कि प्रारंभिक जांच में हालात चिंताजनक हैं।
उन्होंने कहा, “आज गांव में घर-घर जाकर जांच की गई, जिसमें टीबी, पीलिया, बच्चों में बीमारी और कैंसर के मरीज मिले हैं। पानी के जो सैंपल भरे गए हैं, उनमें से अधिकांश फेल पाए गए हैं। शुरुआती जांच में यह साफ लग रहा है कि दूषित पानी और प्रदूषित हवा इन बीमारियों का बड़ा कारण है। गांव के चारों ओर राइस मिलें हैं और आशंका है कि राइस मिलों का गंदा पानी जमीन में छोड़ा जा रहा है, जिससे बीमारियां फैल रही हैं। अगर पानी और हवा जल्द ठीक नहीं हुई तो ये बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती हैं।”
राइस मिलों से घिरा गांव, जमीन में जा रहा गंदा पानी ग्रामीणों के लिए मौत का ग्रास बन रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के चारों ओर स्थित राइस मिलों से निकलने वाला गंदा पानी जमीन में छोड़ा जा रहा है, जिससे भूजल दूषित हो चुका है। इसके अलावा राइस मिलों से निकलने वाला धुआं और धान की भूसी की धूल गांव में फैलकर लोगों की सांसों में जहर घोल रही है।
CLU और CTO में बड़ा विरोधाभास उजागर
इस पूरे मामले में प्रशासनिक व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
आरटीआई के माध्यम से जिला टाउन प्लानिंग अधिकारी ने बताया है कि गुहला-चीका क्षेत्र में केवल 12 राइस मिलों के पास ही चेंज ऑफ लैंड यूजिंग (CLU) है।
वहीं दूसरी ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा 116 राइस मिलों को कंसेंट टू ऑपरेट (CTO) जारी किया गया है।
इस विरोधाभास ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बिना CLU के राइस मिलों को प्रदूषण विभाग ने संचालन की अनुमति कैसे दे दी।
सरपंच का आरोप – राइस मिलें गांव का विनाश कर रही हैं
गांव की सरपंच सर्वजीत कौर ने कहा कि राइस मिलें गांव के लिए विकास नहीं बल्कि विनाश साबित हो रही हैं।
उन्होंने कहा, “ये राइस मिलें हमारे गांव का कल नहीं, बल्कि विनाश बन गई हैं। अगर इन पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो खुशहाल माजरा एक त्रासदी का गांव बन जाएगा। लोग गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं और प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि लोगों की जिंदगी बच सके।”
ग्रामीणों में डर और आक्रोश
गांव में हालात ऐसे हो चुके हैं कि लोग अपने बच्चों के भविष्य को लेकर डरे हुए हैं। कई परिवार गांव छोड़ने की सोच रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों को शिकायत दी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
अब प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के बाद अब सवाल यह है कि
क्या बिना CLU चल रही राइस मिलों पर कार्रवाई होगी?
क्या दूषित पानी और हवा से जूझ रहे ग्रामीणों को राहत मिलेगी?
या फिर खुशहाल माजरा का यह संकट फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?



