गुहला-चीका (कैथल)।
गुहला-चीका क्षेत्र में राइस मिलों से फैल रहे प्रदूषण को लेकर उठ रहा जनआक्रोश अब सीधे प्रशासनिक जवाबदेही पर आ गया है। सदरहेड़ी और खुशहाल माजरा गांव के ग्रामीणों द्वारा किए गए प्रदर्शन के बीच अब आरटीआई के माध्यम से सामने आए सरकारी रिकॉर्ड ने प्रदूषण विभाग और जिला प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरटीआई से हुआ चौंकाने वाला खुलासा
खुशहाल माजरा के पूर्व सरपंच चांदीराम ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि प्रदूषण विभाग के अधिकारी लगातार ग्रामीणों को गुमराह करते रहे, लेकिन आरटीआई से जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद गंभीर हैं।
पूर्व सरपंच चांदीराम के अनुसार प्रदूषण विभाग द्वारा जारी किए गए कंसेंट टू ऑपरेट के आंकड़े इस प्रकार हैं—
वर्ष 2015 में — 1 राइस मिल
वर्ष 2020 में — 1 राइस मिल
वर्ष 2021 में — 5 राइस मिल
वर्ष 2022 में — 9 राइस मिल
वर्ष 2023 में — 27 राइस मिल
वर्ष 2024 में — 41 राइस मिल
वर्ष 2025 में — 32 राइस मिल
जबकि जिला टाउन प्लानिंग अधिकारी से प्राप्त आरटीआई के अनुसार—
वर्ष 2023 में — केवल 3 राइस मिलों को चेंज ऑफ लैंड यूजिंग
वर्ष 2024 में — 6 राइस मिलों को चेंज ऑफ लैंड यूजिंग
वर्ष 2025 में — सिर्फ 1 राइस मिल को चेंज ऑफ लैंड यूजिंग जारी की गई
बिना सीएलयू कैसे मिल गया संचालन की अनुमति?
ग्रामीणों का कहना है कि जब इतनी कम संख्या में चेंज ऑफ लैंड यूजिंग जारी की गई, तो दर्जनों राइस मिलों को कंसेंट टू ऑपरेट किस आधार पर दिया गया?
यह सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन और प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
पूर्व सरपंच चांदीराम ने सवाल उठाते हुए कहा—
“जब नियम कहता है कि बिना चेंज ऑफ लैंड यूजिंग कोई औद्योगिक इकाई नहीं चल सकती, तो फिर बिना सीएलयू के राइस मिलों को संचालन की अनुमति किस अधिकारी ने दी? अब सवाल यह है कि ऐसे अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?”
प्रदर्शन में उठी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
सदरहेड़ी गांव में हुए प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह मामला केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक लापरवाही और नियमों के खुले उल्लंघन का मामला बन चुका है।
ग्रामीणों ने मांग की कि—
जिन अधिकारियों ने बिना सीएलयू के कंसेंट टू ऑपरेट जारी किए
जिन अधिकारियों ने आंखें मूंदकर निरीक्षण रिपोर्ट दी
और जिनकी वजह से गांवों में कैंसर, पीलिया और पेट की गंभीर बीमारियां फैलीं
उन सभी अधिकारियों की पहचान कर कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाए।
चार गांव, दस हजार आबादी और गंभीर बीमारियां
ग्रामीणों ने बताया कि राइस मिलों से उड़ने वाली राख और जमीन में छोड़े जा रहे गंदे पानी के कारण
खुशहाल माजरा, सदरहेड़ी सहित चार गांव प्रभावित हैं, जहां करीब 10 हजार की आबादी निवास करती है।
इन गांवों में कैंसर, पीलिया, पेट और लीवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं।
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
पूर्व सरपंच चांदीराम और अन्य ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी कि—
“अगर इस सरकारी रिकॉर्ड के खुलासे के बावजूद दोषी अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती, तो ग्रामीण मजबूर होकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।”
ग्रामीणों का कहना है कि वे अब केवल राइस मिल मालिकों पर नहीं, बल्कि उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई चाहते हैं।
अब सबकी नजर प्रशासन पर
अब देखने वाली बात यह होगी कि—
क्या सरकार और प्रशासन आरटीआई से उजागर हुए तथ्यों पर संज्ञान लेते हैं
क्या बिना नियम के अनुमति देने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होती है
या फिर यह मामला भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगा
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि वे स्वच्छ पर्यावरण, साफ पानी और स्वस्थ जीवन के अधिकार की लड़ाई को हर वैधानिक मंच तक ले जाएंगे।

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