हरियाणा के करनाल जिले में धान खरीद और भंडारण से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने 5 सरकारी अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। देर रात हुई इस कार्रवाई से मंडी अफसरों में हड़कंप मचा है।इनमें इंद्री के हरियाणा वेयर हाउसिंग से जुड़े तकनीकी सहायक प्रदीप कुमार, इंद्री फूड सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर रणधीर सिंह, तरावड़ी से फूड सप्लाई विभाग के इंस्पेक्टर देवेंद्र कुमार, असंध में हैफेड मैनेजर प्रमोद कुमार और निसिंग में हैफेड मैनेजर दर्शन सिंह शामिल है।
पुलिस के मुताबिक, एसआईटी की जांच में सामने आया कि सरकारी विभागों में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आपसी मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया। रिकॉर्ड, दस्तावेज और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने इन अधिकारियों की संलिप्तता पाई गई, जिसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच में जुटी हुई है।
शुक्रवार की देर रात हुए एक्शन के बारे में ACP की तीन बातें…
फर्जी गेट पास जारी करने में रही अहम भूमिका : एएसपी कांची सिंघल ने बताया कि एसआईटी की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि आरोपियों की भूमिका फर्जी गेट पास जारी करने में रही है। इन गेट पास के जरिए धान की खरीद और भंडारण में हेराफेरी की गई। इसी मामले को लेकर 9 जनवरी को एक एसआईटी का गठन किया गया था। एसआईटी की कमान आईपीएस अधिकारी श्रीमती कांची सिंगल को सौंपी गई, जिन्होंने जांच को तेजी से आगे बढ़ाते हुए इन पांचों अधिकारियों को गिरफ्तार किया।
मिलीभगत से सरकार को करोड़ों का नुकसान : एएसपी कांची सिंघल ने बताया कि एसआईटी की जांच में यह तथ्य भी सामने आए हैं कि धान की खरीद, भंडारण और आगे की प्रक्रिया में तय नियमों और मानकों का पालन नहीं किया गया। अधिकारियों ने एक-दूसरे



