बड़ी खबर अम्बेडकरनगर /लखनऊ।।।।
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हरिमोहन दुबे ने पत्रकारों पर फर्जी मुकदमों और अन्याय के खिलाफ उठाई आवाज……..
पत्रकार समाज कल्याण सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष श्री हरिमोहन दुबे ने पत्रकारों पर हो रहे उत्पीड़न, फर्जी मुकदमों और लगातार बढ़ रहे दमन के मामलों को लेकर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र की आत्मा – स्वतंत्र पत्रकारिता – पर सीधा हमला बताया है।
दुबे ने कहा कि वर्तमान समय में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहाँ ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकारों को झूठे मामलों में फँसाया गया, उन्हें धमकाया गया और न्याय के बजाय प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से स्थानीय व ग्रामीण पत्रकार, जो सीमित संसाधनों में जनता की आवाज़ उठाते हैं, उन्हें सत्ता और प्रशासन की आलोचना करने पर निशाना बनाया जा रहा है। यह प्रवृत्ति न केवल चिंताजनक है, बल्कि लोकतंत्र के मूलभूत सिद्धांतों के भी विरुद्ध है।
दुबे ने कहा कि पत्रकारों के विरुद्ध राजनैतिक दबाव में दर्ज हो रहे मुकदमे अधिकांशतः फर्जी, आधारहीन और प्रतिशोध की भावना से प्रेरित होते हैं। ये मुकदमे पत्रकारों को डराने और उन्हें चुप कराने का माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि जब एक पत्रकार पर झूठा मुकदमा दर्ज होता है, तो यह केवल उस व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरी पत्रकारिता पर हमला होता है।
इसी क्रम में श्री हरिमोहन दुबे ने पत्रकार हितों को सुरक्षित रखने के लिए सरकार और प्रशासन के समक्ष कई महत्वपूर्ण माँगें रखी हैं:
- पत्रकार सुरक्षा कानून तुरंत लागू किया जाए, जिससे पत्रकारों को कानूनी संरक्षण मिल सके।
- पत्रकार सुरक्षा आयोग का गठन हो, जिसमें निष्पक्ष पत्रकार, पूर्व न्यायाधीश और मानवाधिकार कार्यकर्ता शामिल हों।
- पत्रकारों पर दर्ज फर्जी मुकदमों की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
- ग्रामीण और स्वतंत्र पत्रकारों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं जैसे बीमा, पेंशन और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ दिया जाए।
- पत्रकारों को सरकारी विज्ञापन या मान्यता से जोड़ने के लिए पारदर्शी प्रणाली लागू की जाए, जिसमें पक्षपात की कोई गुंजाइश न हो।
- पत्रकारों के विरुद्ध कार्यवाही से पहले मीडिया परिषद या प्रेस काउंसिल से राय लेना अनिवार्य किया जाए।
दुबे ने यह भी कहा कि “पत्रकार केवल खबर नहीं लिखता, वह समाज की चेतना और लोकतंत्र की मशाल जलाए रखता है। यदि उसी मशाल को बुझाने का प्रयास किया जाएगा, तो देश अंधेरे की ओर चला जाएगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पत्रकारों के साथ न्याय नहीं हुआ, तो समिति सड़कों पर उतरकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराएगी और पत्रकारों के हक की लड़ाई को मजबूती से लड़ा जाएगा।
अंत में, श्री हरिमोहन दुबे ने सभी पत्रकार संगठनों से एकजुटता और संघर्ष की भावना के साथ आने की अपील की और दोहराया कि “सत्ता चाहे जितनी ताकतवर हो, कलम की ताकत को नहीं तोड़ा जा सकता।”
एडवोकेट हरिमोहन दुबे वरिष्ठ पत्रकार एवं संस्थापक /अध्यक्ष पत्रकार समाज कल्याण सेवा समिति उत्तर प्रदेश।।



