गुहला चीका/गुरदेव जोसन/हुक्म मैहला/दैनिक अर्मत धारा/18 सितंबर/कृषि विभाग के अधिकारी की तरफ से उपमण्डल गुहला के अधीनस्थ गाँवों में किसानों को धान के अवशेषों में आग न लगाने के सम्बध में जागरुक किया जा रहा। किसानों को जागरुक करने हेतू विभाग द्वारा भ्रसक प्रयास किये जा रहे है। गाँव-गाँव में जाकर लोगो को फसल अवशेष में आग न लगाते हुऐ इन०सीटू व एक्स०सीटू के माध्यम से पराली का प्रबंधन करने हेतू जागरुक किया जा रहा है। विभाग द्वारा फसल अवशेष प्रबन्धन करने हेतू आधुनिक यन्त्र जैसे कि एस०एम०एस० सिस्टम, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रा चौपर आदि पर अनुदान राशि दी जा रही है।

ग्राम स्तर व स्कूलो, कॉलजो मे किया जा रहा जागरुक डौं- कन्चन कुमारी द्वारा बताया गया रोजाना विभाग द्वारा किसानों फसल के अवशेषों को प्रबंध करने हेतू जागरुक किया जा रहा है। विभाग द्वारा जागरुकता अभियान हेतू गाँव ककेहडी, रत्ता खेडा कडाम, चाणचक, डण्डौता, चाबा, लालपूर में कैम्प लगायें और उपमण्डल गुहला में स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण सस्थान, गुहला में विभाग द्वारा बच्चों को फसल अवशेष प्रबन्धन हेतू जागरुक किया, वही विभाग द्वारा चलाई जा रही योजानाओं के बारे में बताया जा रहा है जैसे कि किसान प्रति एकड 1200 रुपये की प्रोत्साहित राशि किसानों को धान अवशेष प्रबंधन करने पर दी जा रही है।

फसल अवशेषों में आग लगाने पर एफ०आई०आर०, जुर्माना और मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर किया जायेगा रेड एंट्री डॉ कन्चन कुमारी द्वारा बताया गया कि किसान पराली को जलाने सें सख्त परहेज करे। पराली जलाने से केवल पर्यावरण ही नही बलकि खेत की उर्वरा शक्ति भी खत्म होती है। किसानों को अपनी भूमि पर्यावरण एवं वायु को बचाने के लिए फसल अवशेष प्रबंधन करना चाहिए। ताकि आने वाली पीढियों को स्वच्छ वातावरण एवं स्वस्थ भूमि मिल सके। फसल अवशेषों में आग लगाने वाले किसानों को रोकने हेतू सम्बधित विभागो द्वारा प्रयास किये जाने है, अगर कोई किसान अवशेषों को जलाते हुए पाया गया तो विभाग द्वारा इस प्रकार से

चलान / जुर्माना लेने का प्रावधान है।

1. दो एकड से कम भूमि पर प्रति घटना पाँच हजार रुपये ।

2. दो एकड से पॉच एकड तक प्रति घटना दस हजार रुपये।

3. पाँच एकड़ से अधिक भूमि पर प्रति घटना तीस हजार रुपये

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