👉🏻एडवोकेट हरिमोहम दूबे वरिष्ठ पत्रकार अंबेडकरनगर,लखनऊ की खास रिपोर्ट।।।
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अंबेडकरनगर में पीड़ित फरियादियों का फर्जी निस्तारण मामला…….
अंबेडकरनगर जिले में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर आए दिन सवाल उठते रहे हैं। ताज़ा मामला थानों और तहसीलों में आने वाले पीड़ित फरियादियों की शिकायतों से जुड़ा है। आरोप है कि बड़ी संख्या में फरियादियों की समस्याओं का वास्तविक निस्तारण करने के बजाय महज़ कागज़ी कार्रवाई दिखाकर मामलों को “निस्तारित” कर दिया जाता है। इस फर्जी निस्तारण की प्रवृत्ति ने न केवल पीड़ितों का भरोसा हिलाया है बल्कि शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले के कई थानों में दर्ज शिकायतों पर पीड़ित को बिना न्याय दिलाए फाइल पर खानापूर्ति कर दी जाती है। उदाहरणस्वरूप किसी व्यक्ति की ज़मीन कब्जे में होने, घरेलू हिंसा या धोखाधड़ी जैसी गंभीर शिकायतों को सुनवाई के बजाय महज़ रिपोर्ट बनाकर “समाधान” दिखा दिया जाता है। इससे पीड़ित वर्षों तक भटकते रहते हैं और उन्हें न्याय नहीं मिल पाता। इसी तरह तहसीलों में होने वाली समाधान दिवस बैठकों में भी अक्सर यही देखा गया है कि अधिकारियों द्वारा पीड़ित को बुलाए बिना ही उसके प्रकरण का निस्तारण रिकॉर्ड में दिखा दिया जाता है।
फर्जी निस्तारण की यह प्रवृत्ति दरअसल भ्रष्टाचार और लापरवाही का नतीजा है। कई बार पीड़ित की शिकायत अगर किसी प्रभावशाली व्यक्ति से जुड़ी होती है तो उस पर कार्रवाई से बचने के लिए उसे औपचारिक रूप से निपटा हुआ दिखा दिया जाता है। वहीं, कई बार पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण भी फरियादी को वास्तविक राहत नहीं मिल पाती। इससे न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गहरा असर पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि शासन-प्रशासन यदि वास्तव में पारदर्शिता लाना चाहता है तो उसे इस फर्जी निस्तारण पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाने होंगे। हर निस्तारित प्रकरण की स्वतंत्र समीक्षा की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वाकई शिकायत का समाधान हुआ या नहीं। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी फरियादी के साथ अन्याय करने की हिम्मत न कर सके।
कुल मिलाकर, अंबेडकरनगर में फरियादियों का फर्जी निस्तारण एक गहरी समस्या बन चुका है। यह न केवल जनता के विश्वास को तोड़ रहा है बल्कि कानून-व्यवस्था की निष्पक्षता पर भी धब्बा है। अगर इस पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई तो पीड़ितों की आवाज दबती ही रहेगी और न्याय की उम्मीदें धूमिल होती जाएंगी।
👉🏻एडवोकेट हरिमोहम दूबे वरिष्ठ पत्रकार अंबेडकर नगर लखनऊ की खास रिपोर्ट।।



