कलेक्टर -सर्किल दरों की समीक्षा और संशोधन प्रणाली की गई लागू

1 अप्रैल से हर साल इन दरों में संशोधन की व्यवस्था लागू की गई

इसका उद्देश्य डीड पंजीकरण के समय संपत्ति के काम मूल्यांकन और उसके परिणाम स्वरुप राज्य को होने वाली राजस्व हानि जैसी गड़बड़ियों पर लगाम लगाना

यह दरें पिछले वर्ष पंजीकरण डीड के अनुसार बेची गई संपत्तियों की वास्तविक दरों में औसत वृद्धि के आधार पर बढ़ाई जाती है

2017 से पहले कलेक्टर दरों की समीक्षा और संशोधन की जिम्मेदारी जिला स्तर पर उपायुक्तों के पास थी

हमारी सरकार ने इस प्रक्रिया को बनाया पारदर्शी और निष्पक्ष

कलेक्टर दरों में संशोधन अब सीधे संपत्ति पंजीकरण मूल्य में वास्तविक वृद्धि से जुड़ा

इससे संपत्ति के मूल्यांकन में निष्पक्षता, पारदर्शिता और स्थिरता होती है सुनिश्चित

भू स्वामियों और खरीदारों दोनों के हितों की होती है रक्षा

स्टांप शुल्क भुगतान करने की जिम्मेदारी संपत्ति के खरीदार की होती है

कलेक्टर दर में वृद्धि से संपत्ति की बाजार दर बढ़ जाती है यह कहना गलत

बाजार दर में वृद्धि के कारण ही राज्य के राजस्व की हानि को रोकने के लिए कलेक्टर दर में वृद्धि हो जाती है आवश्यक।

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