मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर रहेगा जोर
चंडीगढ़/ रविन्द्र पोपली/17 अक्टूबर : मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक भेदभाव को दूर करने तथा मानसिक रोगियों और उनके देखभालकर्ताओं की समस्याओं को समझने के उद्देश्य से मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (एमएचआई), सेक्टर-32, चंडीगढ़ में शनिवार को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 2026 मनाया गया। मानसिक स्वास्थ्य संस्थान ने एनजीओ परिवर्तन के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें मानसिक बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों, उनके देखभालकर्ताओं, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत मानसिक स्वास्थ्य संस्थान के अतिरिक्त निदेशक एवं एनजीओ परिवर्तन के अध्यक्ष डॉ. अजीत सिडाना के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, हाफवे होम और एनजीओ परिवर्तन की ओर से मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं एवं पुनर्वास के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गंभीर मानसिक बीमारी का प्रभाव केवल रोगी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के सदस्यों और देखभाल करने वालों को भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। लंबे समय तक देखभाल करने के कारण उन्हें मानसिक तनाव और शारीरिक थकान जैसी समस्याएं भी झेलनी पड़ती हैं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. रवनीत कौर, निदेशक-प्रधानाचार्य, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल (जीएमसीएच), चंडीगढ़ तथा निदेशक, मानसिक स्वास्थ्य संस्थान ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के प्रति समाज में जागरूकता, समझ और स्वीकार्यता बढ़ाना बेहद जरूरी है। मानसिक बीमारी से प्रभावित लोगों को सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
एस्पायर’ कार्यक्रम का शुभारंभ
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेक्टर-32 में एकेडमिक सपोर्ट प्रोग्राम फॉर इंटीग्रेशन, रिकवरी एंड एजुकेशन (ASPIRE) का शुभारंभ रहा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य मानसिक बीमारी से जूझ रहे व्यक्तियों को मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था में दोबारा शामिल होने के लिए तैयार करना है, ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकें।
इस पहल के तहत मानसिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों को शैक्षणिक मार्गदर्शन और सहयोग दिया जाएगा। उन्हें मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था में लौटने के लिए प्रोत्साहित करने के साथ-साथ दूरस्थ शिक्षा और ओपन स्कूल प्रणाली के माध्यम से पढ़ाई शुरू करने या जारी रखने में भी सहायता प्रदान की जाएगी। रोजगार प्राप्त करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले प्रतिभागियों को भी सहयोग दिया जाएगा। इसके लिए विभिन्न संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
डॉ. रवनीत कौर ने जानकारी दी कि एस्पायर कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक मानसिक स्वास्थ्य संस्थान, सेक्टर-32 में हस्तक्षेप एवं मार्गदर्शन सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। हालांकि, इस कार्यक्रम में नामांकित मरीज शैक्षणिक तैयारी के लिए प्रतिदिन संस्थान की डिसेबिलिटी असेसमेंट, रिहैबिलिटेशन एंड ट्रायेज (DART) सेवाओं का लाभ लेने के लिए भी आ सकते हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल मानसिक बीमारी से प्रभावित लोगों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने, आत्मनिर्भर बनने और समाज में अपनी भागीदारी बढ़ाने में मददगार साबित होगी। इसके साथ ही, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, कानूनी सहायता और सामाजिक सहयोग को जरूरतमंद व्यक्तियों तक पहुंचाने तथा इन सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने पर भी जोर दिया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दिया समावेशिता का संदेश
कार्यक्रम के दौरान मासिक बीमारी से प्रभावित व्यक्तियों ने गायन, नृत्य, कविता पाठ और लघु नाटिका सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से आत्म-अभिव्यक्ति, सामाजिक समावेश, सहभागिता और मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संदेश दिया गया।
पूरे कार्यक्रम का संचालन मानसिक स्वास्थ्य संस्थान की डॉ. शिवांगी, एमएस तथा डॉ. अपराजिता लोबाना, डीएमएस, एमएचआई ने किया। अंत में एनजीओ परिवर्तन की महासचिव डॉ. शिखा त्यागी ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कार्यक्रम में शामिल सभी गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों, आयोजकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, पुनर्वास, सामाजिक स्वीकार्यता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर मानसिक बीमारी से प्रभावित लोगों को आत्मनिर्भर बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।