बैंकर्स व बीमा कंपनियां पराली प्रबंधन कर रही फर्मों का करें हर संभव सहयोग*

*डीसी ने समन्वय बैठक में जारी की सख्त हिदायतें*
*कहा-प्राथमिक क्षेत्र को अनदेखा न करें बैंक अधिकारी*

*पराली प्रबंधन करने वाली फर्में भी नियमों की पालन करें, ताकि बैंकों व बीमा कंपनियों को उन्हें सुविधा देने में न आए परेशानी*

कैथल/गुरदेव जोसन/दैनिक अर्मत धारा/20 सितंबर/                   डीसी प्रीति ने कहा कि पराली प्रबंधन हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। पराली जलाए जाने का कोई भी मामला सामने आता है तो नियमानुसार जिला प्रशासन द्वारा सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जिला प्रशासन का प्रयास है कि पराली जलाने की बजाए पराली प्रबंधन में काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करें। ताकि उन्हें पराली एकत्रित करके उसे मार्केट तक पहुंचाने में परेशानी न हो और किसानों को भी पराली प्रबंधन में मदद मिल सके।

          डीसी प्रीति लघु सचिवालय स्थित सभागार में जिले में पराली का प्रबंधन करने वाली फर्म मालिकों की जिले के बैंकर्स व बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ समन्वय बैठक को संबोधित कर रहीं थीं। इस  बैठक का उद्देश्य पराली  प्रबंधन करने वाली फर्म संचालकों  की बैंकों से ऋण दिलवाए जाने व पराली प्लांट का बीमा करवाए जाने में आने वाली परेशानियों को दूर करना था। डीसी प्रीति के निर्देशानुसार इस बैठक में जिला परिषद के सीईओ सुरेश राविश, जिले के तीनों एसडीएम अजय सिंह, कैप्टन प्रमेश सिंह व अजय हुड्डा, डीडीपीओ रितु लाठर, एलडीएम एसके नंदा सहित अन्य अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में पराली प्रबंधन करने वाली फर्म संचालकों ने अपनी बैंकों से लोन मिलने व बीमा करवाने में आने वाली परेशानियों बारे बताया। डीसी ने बैंकर्स को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि वे पराली प्रबंधन करने वाली फर्म संचालकों को नियमानुसार लोन दिलवाएं। यदि नियमों के संबंध में कोई बाधा है तो अपने मुख्यालय स्तर से पता करवाएं। नियमों के तहत पराली प्रबंधन करने वाली फर्मों को ऋण दिलवाएं। इसी प्रकार से बीमा कंपनियां इनसे प्रोजेक्ट बनवाकर बीमा संबंधी आवेदन स्वीकार करें। अपने मुख्यालय स्तर पर संपर्क करें। ताकि ये लघु एवं मध्यम उद्योग संचालकों को एक सुरक्षा कवर मिल सके और वे पराली प्रबंधन में और अधिक मेहनत करें। पराली प्रबंधन ठीक ढंग से होगा तो किसान को भी राहत मिलेगी। साथ ही पराली को आग लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि इस बार जिले में पराली जलाने की घटनाओं को शून्य का लक्ष्य रखा गया है। यदि कहीं पराली जलने की घटना सामने आती है तो न केवल संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, साथ ही जमीनी स्तर पर संबंधित जिम्मेदार विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। एलडीएम एसके नंदा ने कहा कि वे बैंकर्स के साथ एक बैठक करके नियमानुसार पूरी जानकारी जुटाएंगे। ताकि पराली प्रबंधन करने वाली फर्मों को सुविधाएं दी जा सकें। इसी प्रकार से बीमा एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने बड़ा ही सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि वे उन फर्मों के प्रोजेक्ट का अध्ययन करके उन्हें सुविधाएं देंगे। जल्द ही इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी की जाएगी।

दूसरी ओर डीसी प्रीति ने पराली प्रबंधन करने वाली फर्माें के संचालकों को निर्देश दिए कि वे बैंकों व बीमा कंपनियों की जरूरत अनुसार कागजात पूरे रखें। किसी भी तरह के फर्जी कागजात नहीं होने चाहिए। ताकि बैंकर्स व बीमा कंपनियों को भी उन्हें सुविधा देने में किसी तरह की परेशानी न आए। दोनों ही ओर से सकारात्मक प्रयास होंगे तो जिले में पराली प्रबंधन की दिशा में एक सफल तालमेल बनाया जा सकेगा। जिले में बहुत सी फर्में पराली प्रबंधन का अच्छा काम कर रही हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि इन फर्म संचालकों को कोई परेशानी न हो और सीजन में जरूरत के समय ये किसानों से पराली खरीद सकें।

उन्होंने कृषि विभाग के अधिकारियों को भी सख्त आदेश दिए कि वे बेलर सहित अन्य संसाधनों को दुरुस्त व पर्याप्त स्टॉक रखें। ताकि जब सीजन में कटाई का कार्य चरम पर होगा, उस समय संसाधनों का अभाव न हो। डीसी ने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे गांवों में जाकर लोगों से बातचीत करें। उन्हें पराली को जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में प्रेरित करें। पराली प्रबंधन से होने वाले फायदे भी बताएं। सरकार द्वारा प्रति एकड़ पराली प्रबंधन के लिए 1200 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। डीसी प्रीति ने किसानों का भी आह्वान किया कि वे पराली प्रबंधन में सहयोग करें। जिला प्रशासन उनके साथ खड़ा है। सरकार की हिदायत अनुसार पराली न जलाएं। ताकि पर्यावरण संरक्षण किया जा सके।

सरपंचों के खिलाफ भी होगी कार्रवाई-बैठक में डीडीपीओ ने पराली प्रबंधन में सरपंचों के योगदान की जानकारी दी। डीसी प्रीति ने कहा कि जिस गांव में पराली जलाने की घटनाएं सामने आएंगी, उस गांव के सरपंच की भी जवाबदेही तय की जाएगी। इसी प्रकार से जिस थाना क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं सामने आएंगी, उस थाने के एसएचओ की भी जवाबदेही तय की जाएगी। इसीलिए पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए सभी अपनी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें।

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