आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती और वेतन भुगतान में गड़बड़ी का आरोप, एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियां जांच के घेरे में; 200 करोड़ रुपये सालाना के टेंडरों पर उठाए सवाल
रविंद्र पोपली
चंडीगढ़, 17.10.26
चंडीगढ़/रविन्द्र पोपली अमृतधारा/17.10.26 : चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती और वेतन भुगतान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। सीबीआई की छापेमारी के बाद एजुकेशन डिपार्टमेंट ग्रुप-डी यूनियन और यूटी चंडीगढ़ सबऑर्डिनेट सर्विस फेडरेशन के प्रधान एवं शिकायतकर्ता रणजीत मिश्रा ने चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले से जुड़े कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने करीब 1000 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच में बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई और कहा कि जांच का दायरा केवल कंपनियों तक सीमित न रहकर प्रशासन के उच्च अधिकारियों तक भी पहुंचना चाहिए।
मिश्रा ने दावा किया कि एक ही परिवार से जुड़ी चार कंपनियां इस पूरे मामले की जड़ हैं। उनके अनुसार, आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े करीब 200 करोड़ रुपये सालाना के टेंडरों में कथित गड़बड़ियों की आशंका है। उन्होंने जांच एजेंसियों से टेंडर प्रक्रिया, अनुभव प्रमाणपत्रों, कर्मचारियों की तैनाती और वेतन भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड की गहन जांच करने की मांग की।
चार कंपनियों के नेटवर्क पर सवाल, अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
मिश्रा ने आरोप लगाया कि चार कंपनियों के आपसी संबंधों और टेंडर हासिल करने के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों की पड़ताल से मामले की कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ सकती हैं। उन्होंने कहा कि कथित अनियमितताओं में सरकारी तंत्र के विभिन्न स्तरों पर तैनात वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
उन्होंने संकेत दिया कि मामले से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध सबूतों के आधार पर कई अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। मिश्रा ने मांग की कि यदि जांच के दौरान किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण मिलते हैं, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सीबीआई की छापेमारी के बाद जांच में तेजी की उम्मीद
मामले में सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने और चंडीगढ़ में चार ठिकानों पर छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच के दौरान दस्तावेजों की पड़ताल के साथ लैपटॉप और कंप्यूटर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए जाने की भी जानकारी है। अब इन उपकरणों में मौजूद डिजिटल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच से टेंडर प्रक्रिया तथा संबंधित कंपनियों की भूमिका के बारे में तथ्य सामने आने की उम्मीद है।
मिश्रा ने करीब 1000 करोड़ रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग करते हुए उम्मीद जताई कि सीबीआई की पड़ताल से मामले की पूरी तस्वीर सामने आएगी। हालांकि, करीब 200 करोड़ रुपये सालाना के टेंडरों और 1000 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं के बीच संबंध तथा कुल राशि की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।
मार्च से शिकायत लंबित रहने का भी दावा
मिश्रा ने दावा किया कि उन्होंने इस मामले को लेकर मार्च महीने से विजिलेंस के समक्ष शिकायत दी थी, लेकिन उस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बाद में शिकायत दिए जाने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई शुरू होने की बात भी कही। इस दावे और शिकायत पर हुई कार्रवाई की स्थिति की संबंधित रिकॉर्ड से पुष्टि की जानी बाकी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मिश्रा ने मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता सामने आने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल, कंपनियों और अधिकारियों की कथित संलिप्तता से जुड़े आरोप जांच के अधीन हैं। किसी व्यक्ति या कंपनी की जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही निर्धारित होगी।