समालखा(राकेश वर्मा) नई अनाज मंडी स्थित जैन स्थानक मे मंगलवार को धर्म प्रवचन करते हुए आचार्य उपेन्द्र मुनि ने सम्यक ज्ञान की विरक्ति के कारण बताते हुए
कहा कि पुराने संस्कार, सम्यक दर्शन की कमी और सम्यक आचरण का अभाव है। जब तक व्यक्ति सही विश्वास और सही आचरण के साथ नहीं चलता, तब तक ज्ञान के बावजूद वह भटक सकता है और मोह में फंसा रह सकता है। व्यक्ति को भले ही सम्यक ज्ञान हो, लेकिन पुराने विचारों और संस्कारों के कारण उसका मन बार-बार गलत दिशा में भटक सकता है। अगर किसी के मन में सही विश्वास नहीं है, तो सम्यक ज्ञान के बाद भी वह भटकाव का शिकार हो सकता है। सम्यक दर्शन के बिना ज्ञान अधूरा है। सम्यक ज्ञान के साथ-साथ सही आचरण भी आवश्यक है। बिना आचरण के ज्ञान केवल किताबी ज्ञान बनकर रह जाता है, जो जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति नहीं दिला सकता। जब तक ज्ञान संशय, असमंजस या विपरीतता से रहित नहीं है, तब तक उसे सम्यक ज्ञान नहीं कहा जा सकता और वह विरक्ति का कारण बन सकता है।ऐसे किसी भी कार्य या विचार को अपनाना जो मिथ्यात्व को बढ़ावा देता हो, वह सम्यकत्व की विराधना का कारण बनता है और ज्ञान से भटकाता है।
धर्म प्रवचनो के बाद वीर चन्दन बाला महिला मण्डल के सौजन्य से जरूरतमन्द महिला पुरुष व बच्चो को कपड़े वितरीत किये गए। धर्म गुरू उपेन्द्र मुनि ने अपने हाथों से जरूरतमंदो को कपडे वितरित किये। इस मौके पर एसएस जैन सभा के प्रधान वीर प्रकाश जैन, जैनेन्द्र जैन, शाह जैन, राजेन्द्र जैन, अमित जैन, ईश्वर जैन,अतुल जैन, महिला मण्डल से नेहा जैन,पुजा जैन,प्रांची जैन व मिनाक्षी जैन आदि उपस्थित रहे।

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