यमुनानगर (अंजू प्रवेश कुमारी दैनिक अमृत धारा) इंटक फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामीनाथ जायसवाल ने देश में पिछले 12 वर्षों की शासन व्यवस्था और विकास के दावों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी सरकार की सफलता का आकलन केवल विज्ञापनों, प्रचार अभियानों और राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन में आए वास्तविक बदलाव से किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज देश बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं, श्रमिकों के अधिकारों तथा शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी बुनियादी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में विकास के दावों की निष्पक्ष समीक्षा समय की आवश्यकता है।
स्वामीनाथ जायसवाल ने कहा कि सरकारों द्वारा आधारभूत संरचना, डिजिटल सेवाओं और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से विकास के प्रयास किए गए हैं, लेकिन यह भी देखना आवश्यक है कि इन योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचा या नहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का उद्देश्य केवल कुछ क्षेत्रों में विकास दिखाना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को सम्मानजनक जीवन, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने रोजगार को देश की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि लाखों शिक्षित युवा डिग्री प्राप्त करने के बावजूद स्थायी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। सरकारी विभागों में बड़ी संख्या में रिक्त पद होने के बावजूद भर्ती प्रक्रियाएं अपेक्षित गति से पूरी नहीं हो रही हैं। निजी क्षेत्र में भी रोजगार की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि श्रमिक देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिक आज भी सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन, स्वास्थ्य सुविधाओं और कार्यस्थल सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सरकारों का दायित्व केवल उद्योगों का विस्तार करना नहीं, बल्कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना भी है।
महंगाई पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों, ईंधन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत ने आम परिवारों के बजट पर भारी दबाव डाला है। यदि आय स्थिर रहे और खर्च लगातार बढ़ते जाएं तो आर्थिक विकास के आंकड़े आम नागरिक की परेशानियों को कम नहीं कर सकते।
किसानों की स्थिति पर बोलते हुए स्वामीनाथ जायसवाल ने कहा कि कृषि पर निर्भर बड़ी आबादी को उचित मूल्य, सस्ती लागत, सिंचाई सुविधाएं, बीमा सुरक्षा और बाजार तक आसान पहुंच उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। कृषि सुधार तभी सार्थक माने जाएंगे जब किसानों की आय में वास्तविक वृद्धि दिखाई देगी।
उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं किसी भी विकसित राष्ट्र की आधारशिला होती हैं। यदि ये सुविधाएं सीमित वर्ग तक ही सिमट जाएं तो सामाजिक असमानता बढ़ती है। इसलिए ऐसी नीतियों की आवश्यकता है जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मौजूद अंतर को कम करें और सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान करें।
स्वामीनाथ जायसवाल ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जनता के मुद्दों पर खुली चर्चा, असहमति का सम्मान और तथ्यों के आधार पर नीतियों का मूल्यांकन स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। उन्होंने कहा कि आलोचना को विरोध नहीं बल्कि सुधार के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए।
उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर देते हुए कहा कि धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज को बांटने वाली राजनीति देश के हित में नहीं है। भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी विविधता और सामाजिक एकता है। जब समाज में विश्वास और सद्भाव मजबूत होता है, तभी विकास भी स्थायी और समावेशी बनता है।
इंटक फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि देश का युवा रोजगार, किसान बेहतर आय, श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा, महिलाएं सुरक्षित वातावरण तथा आम नागरिक बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं की अपेक्षा रखता है। इसलिए सरकारों को इन वास्तविक मुद्दों पर ठोस कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।



