जेपी गुप्ता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव-2027 की आहट अब दूर नहीं है l सियासी दलों को उसकी पदचाप महसूस होने लगी है। भारतीय जनता पार्टी भी प्रदेश में अपने राजनीतिक अभियान को धीरे-धीरे धार देने लगी है। पार्टी की ओर से भले ही इसे ‘सेवा संकल्प अभियान’ का नाम दिया गया हो, लेकिन इसके स्वरूप और उद्देश्य को देखते हुए इसे आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से अलग करके नहीं देखा जा सकता है l
17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक प्रस्तावित सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा विभिन्न कार्यक्रमों को जनता के बीच परोशने की व्यापक योजना है। सतह पर यह अभियान सेवा और जनसंपर्क की तस्वीर प्रस्तुत करता है, लेकिन राजनीति के आईने में देखें तो इसमें चुनावी रणनीति की स्पष्ट छाया दिखाई देती है। सरकार की उपलब्धियों का बखान, संगठन की सक्रियता बढ़ाना, जनमानस से सीधा संवाद स्थापित करना और विपक्ष की भूमिका को कठघरे में खड़ा करना—ये सभी किसी भी चुनावी अभियान के प्रमुख औजार माने जाते हैं।
चुनावी मौसम में सत्ता पक्ष सामान्यतः अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखता है और विपक्ष की नीतियों एवं भूमिका पर सवाल उठाता है। यदि यही समूची प्रक्रिया चुनाव से काफी पहले शुरू हो जाए तो उसे महज सामाजिक अथवा संगठनात्मक अभियान मानना राजनीतिक विश्लेषण की दृष्टि से अधूरा होगा। इस लिहाज से ‘सेवा संकल्प अभियान’ भाजपा की चुनावी तैयारियों की शुरुआती पटकथा का एक हिस्सा है।
इसी क्रम में बीते शुक्रवार, 11 सितंबर को लखनऊ स्थित भाजपा प्रदेश मुख्यालय में पार्टी की कोर कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक हुई। करीब ढाई घंटे चली इस बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा के महामंत्री (संगठन) बीएल संतोष, प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी, दोनों उपमुख्यमंत्री तथा संगठन और सरकार से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल हुए ।
बैठक समाप्त होने के बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी की ओर से मीडिया को दिए गए बयान में इसे मुख्य रूप से ‘सेवा अभियान’ से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। उन्होंने बताया कि सेवा संकल्प अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक संचालित किया जाएगा। लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बैठक को केवल सेवा अभियान की तैयारियों तक सीमित मानना शायद तस्वीर के केवल एक हिस्से को देखना होगा।
बैठक में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा की दीर्घकालिक रणनीति पर गंभीर मंथन हुआ। ‘ऑपरेशन लोटस’ और ‘मिशन हैट्रिक’ जैसे राजनीतिक लक्ष्यों को लेकर संगठन की दिशा और रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया l
भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश महज एक राज्य नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दृष्टि से भी निर्णायक राजनीतिक धरातल है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करना पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न भी होगा। यही कारण है कि संगठन अभी से अपनी जमीन को मजबूत करने, सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने और कमजोर कड़ियों की पहचान कर उन्हें दुरुस्त करने की कवायद में लगा है।
कोर कमेटी की बैठक में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी गंभीर चिंतन किया गया। चुनाव से पहले शासन की उपलब्धियों को संगठन की सक्रियता से जोड़ना भाजपा की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
इसके साथ ही पार्टी की आंतरिक रणनीति के साथ विपक्ष की संभावित चुनौती से निपटने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। जिन क्षेत्रों में पिछले चुनावों में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं रहा, वहां संगठन को अधिक सक्रिय करने, जनसंपर्क बढ़ाने और राजनीतिक समीकरणों साधने पर जोर दिया जाना स्वाभाविक है।
दरअसल, चुनाव केवल मतदान के दिन नहीं लड़ा जाता। उसकी जमीन महीनों पहले तैयार होती है—कहीं संगठन के विस्तार, कहीं जनसंपर्क के माध्यम से और कहीं सरकार की उपलब्धियों के प्रचार के जरिए। भाजपा का प्रस्तावित सेवा संकल्प अभियान भी इसी राजनीतिक जमीन को तैयार करने की रणनीति का एक अंग है।
नाम सेवा का है, मंच जनसंपर्क का है और नजर 2027 के सत्ता-सिंहासन पर। यही वह बिंदु है जहां ‘सेवा संकल्प अभियान’ और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां एक-दूसरे से जुड़ती हुई दिखाई देती हैं। अभियान की गतिविधियां जितनी व्यापक होंगी, उतनी ही स्पष्ट होती जाएगी कि भाजपा ने उत्तर प्रदेश में चुनावी शतरंज की बिसात पर पहली चाल चल दी है।



