नाना पाटेकर की परछाईं बनकर बनाई पहचान, अब आगे क्या होगा? — तीर्थानंद राव

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बॉलीवुड में कुछ कलाकार अपनी अदाकारी से पहचान बनाते हैं, तो कुछ किसी बड़े सितारे के हमशक्ल के रूप में लोकप्रिय होते हैं। तीर्थानंद राव ऐसे ही कलाकार हैं, जिन्हें लोग ‘जूनियर नाना पाटेकर’ के नाम से जानते हैं। नाना पाटेकर के अंदाज, हाव-भाव और संवादों को पर्दे पर जीवंत करने वाले तीर्थानंद ने फिल्मों और कॉमेडी कार्यक्रमों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। अब उनके सामने अपने भविष्य और करियर को लेकर नए सवाल हैं।
प्रश्न 1: तीर्थानंद जी, नाना पाटेकर जैसे दिखना आपके लिए कितना फायदेमंद रहा?
उत्तर: नाना पाटेकर जी जैसा दिखना और उनके अंदाज को प्रस्तुत कर पाना मेरे करियर की एक बड़ी पहचान बना। इस समानता ने मुझे फिल्मों और मनोरंजन के क्षेत्र में काम करने के अवसर दिए। लेकिन किसी की तरह दिखना एक बात है और कैमरे के सामने अपना हुनर साबित करना दूसरी बात।
प्रश्न 2: नाना पाटेकर के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
उत्तर: नाना जी के साथ काम करना मेरे लिए बेहद खास अनुभव रहा। ‘वेलकम बैक’ सहित कुछ फिल्मों और परियोजनाओं में उनके बॉडी डबल के रूप में काम करने का अवसर मिला। उनके अभिनय को करीब से देखना और उनसे सराहना मिलना मेरे लिए बड़ी बात थी।
प्रश्न 3: क्या नाना जी ने कभी आपके अभिनय की तारीफ की थी?
उत्तर: जी हां, उनके साथ जुड़ी यादें मेरे लिए बहुत कीमती हैं। उनसे मिलने और उनके सामने अपने संवाद प्रस्तुत करने का अवसर मिला। उनके प्रोत्साहन ने मुझे अपने काम के प्रति और गंभीर बनाया।
प्रश्न 4: नाना पाटेकर के जाने के बाद आपके करियर पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: यह मेरे लिए भावनात्मक रूप से बहुत कठिन समय है। नाना जी से जुड़ी मेरी पहचान और मेरा काम दोनों उनके व्यक्तित्व से प्रभावित रहे हैं। आगे फिल्मों में बॉडी डबल के अवसर कितने मिलेंगे, यह फिल्म निर्माताओं की जरूरत पर निर्भर करेगा। लेकिन मैं अपनी कला को जारी रखना चाहता हूं और नए अवसर तलाशता रहूंगा।
प्रश्न 5: क्या आप केवल नाना पाटेकर के हमशक्ल के रूप में ही पहचाने जाना चाहते हैं?
उत्तर: नाना जी के नाम से मुझे पहचान मिली, इसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगा। लेकिन मैं चाहता हूं कि लोग मेरे अभिनय, मेरी कॉमेडी और मेरी मेहनत को भी पहचानें। हमशक्ल होना मेरी पहचान का हिस्सा है, मगर एक कलाकार के रूप में आगे बढ़ना भी मेरे लिए उतना ही जरूरी है।
प्रश्न 6: नए कलाकारों और अपने प्रशंसकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
उत्तर: मेहनत करते रहिए और मुश्किल समय में हिम्मत मत हारिए। किसी बड़े कलाकार से प्रेरणा लेना अच्छी बात है, लेकिन अपनी कला को भी निखारना चाहिए। दर्शकों का प्यार ही कलाकार की सबसे बड़ी पूंजी है।
अंत में: तीर्थानंद राव का सफर इस बात की मिसाल है कि किसी चर्चित सितारे से समानता कलाकार को पहचान दिला सकती है, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए हुनर, मेहनत और नए अवसरों की तलाश जरूरी है। नाना पाटेकर की विरासत को सम्मान देते हुए तीर्थानंद के सामने अब अपनी कला को नए मुकाम तक पहुंचाने की चुनौती है।

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