दैनिक अमृत धारा s k girdhar कैथल। रोडवेज विभाग में चालक, परिचालक एवं बसों की मरमत करने वाले कर्मचारियों की कमी के कारण एवं सरकारी परिचालकों को योजना की इलेक्ट्रिक ठेके की बसों पर लगाए जाने से परिवहन सेवा प्रभावित हो रही है। छात्र छात्राएं व आम जनता परिवहन सेवा से हो रही है वंचित। प्राइवेट बस परमिट धारक सरकार के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं।हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चा 20 मई को जींद में राज्य स्तरीय कन्वेंशन करके बड़े आंदोलन की घोषणा करेगा।
कैथल-रोडवेज कर्मचारी यूनियन हरियाणा 1004 संबंधित एटक द्वारा आज कैथल डिपो में मई दिवस प्रवीण क्योंड़क डिपो प्रधान की अध्यक्षता में मनाया गया। संचालन बलवान कुंडू डिपो सचिव द्वारा किया गया। इस अवसर पर संगठन के राज्य चेयरमैन मुकेश दुहन, राज्य प्रधान निशान सिंह, राज्य महासचिव जयवीर घणघस,मुख्य संगठनकर्ता कृष्ण रवीश, ऑडिटर महावीर सिंधु सुशील कुमार,एवं एटक हरियाणा के राज्य प्रधान श्री पहल सिंह तंवर विशेष रूप से मौजूद रहे। इस मौके पर जसबीर वजीरखेड़ा को राज्य उपप्रधान बनाया गया।राज्य प्रधान निशान सिंह,राज्य महासचिव जयवीर घणघस ने कर्मचारियों को संबोधित करते हुए बताया कि 19 वीं शदी में मजदूरों के काम के घंटो की कोई सीमा नहीं थी। पुरुष, महिलाएं व बच्चो से दिन में 15 से 18 घंटे काम करने को मजबूर किया जा रहा था। 1 में 1986 को अमेरिका के शिकागो शहर में करीब दो लाख मजदूरों ने एक सभा करके मांग की गईं कि हमें 8 घंटे काम के, 8 घंटे आराम के और 8 घंटे मनोरंजन के लिए चाहिए। सभा में हिंसा भड़क गई और पुलिस द्वारा मजदूरों पर लाठियां एवं गोलियां चलाई गई।बहुत से मजदूर शहीद हो गए और कई मजदूर नेताओं की फाँसी की सजा दी। इसके विरोध में विश्व भर में विरोध प्रदर्शन आरंभ हो गए । मजदूरों ने लंबी लड़ाई करके काम के 8 घंटे, आराम के 8 घंटे व मनोरंजन के 8 घंटे का नियम बनवाया। 1989 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय मजदूर सभा ने 1 मई को श्रमिक दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की गई। भारत में मजदूर आंदोलन का इतिहास हमारी आजादी की लड़ाई से जुड़ा है भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1923 को मनाया गया। आज भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इसका श्रेय 45 करोड़ से अधिक मजदूरों को जाना चाहिए जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं। भारत में कुल कार्यबल का लगभग 90% असंगठित हैं मजदूर है।जिनके पास कोई लिखित अनुबंध नहीं होता। आज भी हरियाणा प्रदेश सहित भारत में कई राज्यों में न्यूनतम मजदूरी का सही पालन नहीं हो रहा है। महंगाई आसमान छू रही है। महंगाई अनुसार मजदूरों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। जिससे परिवार का लालन पालन करने में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। रोडवेज विभाग का कर्मचारी विपरीत परिस्थितियों भी जनता की सेवा करके सरकार के खजाने को भरने का काम कर रहा है। दूसरी ओर आज प्रदेश सरकार इलेक्ट्रिक वसो को महंगी दरो 62 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से ठेके पर लेकर संचालन रही है। आज प्रमाण की कोई आवश्यकता नहीं है जिन जिन डिपो में यह इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं। उन डिपो में रिकॉर्ड चेक कर लें ये बसे पूर्ण रूप से रोडवेज विभाग को घाटे की ओर धकेल रही है। रोडवेज विभाग में पहले से ही चालक परिचालकों एवम कर्मशाल मे हेल्पर, मैकेनिक एवम सफाई कर्मचारियों की बहुत कमी है। सरकार द्वारा रोडवेज विभाग के परिचलकों कों ठेके की इलेक्ट्रिक बसों पर लगाया जा रहा है। जिससे सरकारी रोडवेज की बसें परिचालकों की कमी के कारण वर्कशॉपो में खड़ी हो रही है।जिससे ग्रामीण आँचल में रहने वाले छात्र-छात्राओं, व्यापारी, कर्मचारियों एवं आम जनता को परिवहन सेवा से वंचित होना पड़ रहा है। ठेके की इलेक्ट्रिक बसों से सरकार के राजस्व में बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है। प्रदेश सरकार रोडवेज कर्मचारियों की समस्याओं के बारे में समय-समय पर यूनियन प्रतिनिधि मंडल के साथ बातचीत करती है वार्ता की मेज पर कर्मचारियों की मांगों को जायज मानती है लेकिन उन्हें धरातल पर लागू नहीं कर रही है। आज रोडवेज के कर्मचारियों की को मिलने वाले दे अर्जित अवकाश अवकाशों में कटौती की गई है। चालक परिचालक से 15-15 घंटे तक की ड्यूटी ली जा रही है। चालक व परिचारकों को महंगाई एवम कार्य अनुसार पे ग्रेड नहीं दिया जा रहा है। बहुत से डिपो में कर्मचारियों का 2 से 3 साल का रात्रि ठहराव भत्ता एवं ओवर टाइम बकाया है। भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारी इस महंगाई में अनेक परेशानियों का सामना करने को मजबूर हो रहे हैं। आज रोडवेज विभाग में बसों की मरम्मत करने वाले कर्मचारियों की कमी है जिस कारण अनेक डिपो में बिना मरमत के खड़ी है। 2018 में भर्ती हुए ग्रुप डी के कर्मशाला के कर्मचारियों को न तो कॉमन कैडर से बाहर किया जा रहा और ना यह इन्हें तकनीकी पदों पर प्रमोशन दी जा रही है। रोडवेज विभाग के कर्मचारियों को विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा समय पर उनकी समस्याओं एवं मांगों का समाधान न करने के विरोध में आज न्याय के लिए न्यायालयों में चक्कर काट रहे हैं। सरकार से मांग है कि कर्मचारियों को समस्याओं का समाधान करें अन्यथा हरियाणा रोडवेज कर्मचारी सांझा मोर्चे की 30 में की राज्य स्तरीय कन्वेंशन में आगामी आंदोलन करने का निर्णय लेगा । इस मौके पर शमशेर ,अमित शर्मा, प्रदीप कुमार, राममेहर, मनदीप, जलविंदर, जयभगवान,इंद्रपाल,मदन, संदीप,कंवलजीत,रामनिवास, कुलदीप बत्ता,दिनेश आदि साथी मौजूद रहे।

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