सांसद नवीन जिन्दल ने बेटियों के कौशल विकास के लिए की पहल: कृष्मन सिंह सैनी नवीन जिन्दल फाउंडेशन और आईबीएम के बीच हुआ एमओयू दैनिक अमृत धारा कैथल13 अक्टूबर (सुरेंद्र भूना) सांसद नवीन जिन्दल की पहल पर चौधरी ईश्वर सिंह कन्या महाविद्यालय, ढांड-डडवाना में शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल का शुभारंभ हुआ। आज महाविद्यालय के प्रांगण में नवीन जिन्दल फाउंडेशन और विश्व विख्यात कम्पनी आईबीएम के बीच, इनोवेशन सेंटर फॉर एजुकेशन कार्यक्रम के अंतर्गत एक एमओयू पर हस्ताक्षर हुए।यह कार्यक्रम सांसद नवीन जिन्दल के विजन और घोषणा के अनुरूप शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्र की बेटियों को नई तकनीकों में दक्ष बनाकर आत्मनिर्भर और रोजगारोन्मुख बनाना है। इस समझौते के तहत आईबीएम, अपने विश्वसनीय साझेदार ट्रांस न्यूरॉन टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से, कॉलेज की 152 छात्राओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर शार्ट टर्म कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ऑफ्लाइन मोड में कॉलेज कैंपस में आयोजित किया जाएगा, जिसकी अवधि ढाई से तीन महीने की होगी। इस दौरान आईबीएम के विषय विशेषज्ञ, छात्राओं को आधुनिक तकनीकी ज्ञान प्रदान करेंगे। इस प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने वाली सभी छात्राओं को आईबीएम सर्टिफिकेशन प्रदान किया जाएगा।इस अवसर पर नवीन जिन्दल फाउंडेशन (स्किल डेवलपमेंट) से कृष्मन सिंह सैनी ने कहा कि नवीन जिन्दल फाउंडेशन की ओर से यह पहल कुरुक्षेत्र संसदीय क्षेत्र की छात्राओं को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य युवतियों को ऐसे आधुनिक कौशलों से लैस करना है जो उन्हें डिजिटल युग की बदलती कार्यशैली में आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धात्मकता प्रदान करें।उन्होंने कहा कि सांसद नवीन जिन्दल ने महाविद्यालय के डिग्री वितरण कार्यक्रम में छात्राओं की शिक्षा के लिए नई पहल आरंभ करने की बात कही थी।उन्होने सदैव युवाओं और विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा एवं कौशल विकास को प्राथमिकता दी है। उनके मार्गदर्शन में फाउंडेशन ने यह सुनिश्चित किया है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली छात्राओं को भी वही अवसर मिलें जो शहरों में उपलब्ध हैं। यह कार्यक्रम उसी सोच का परिणाम है।उल्लेखनीय है कि आईबीएम और नवीन जिन्दल फाउंडेशन का यह संयुक्त प्रयास हरियाणा में अपनी तरह का पहला और अनोखा उपक्रम है, जो ग्रामीण महाविद्यालयों के शिक्षण तंत्र में एआई और उभरती तकनीकों के एकीकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इस कार्यक्रम से युवतियों में आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता भी विकसित होगी, जिससे वे भविष्य की चुनौतियों का सामना मजबूती से कर सकें।
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