कहा—छोटे व्यापारियों पर बढ़ेगा बोझ, ग्राहकों पर पड़ेगा महंगाई का असर
लखनऊ। राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता एवं कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार यूपीआई लेनदेन के नाम पर सेवा शुल्क का बोझ डालकर आम जनता और छोटे व्यापारियों की जेब पर अतिरिक्त भार डालने की तैयारी कर रही है। उन्होंने सरकार से इस शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि व्यापारिक लेनदेन में 0.4 प्रतिशत एमडीआर छोटे व्यापारियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ साबित होगा। उनके मुताबिक व्यापारी इस अतिरिक्त लागत का भार ग्राहकों पर डाल सकते हैं, जिससे बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने की आशंका है। इससे पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
कांग्रेस सांसद ने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा गया है कि यूपीआई टैक्स से संबंधित प्रस्ताव वित्त मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति के समक्ष रखा गया था। उन्होंने कहा कि वह इस समिति के सदस्य हैं और स्पष्ट करना चाहते हैं कि समिति के समक्ष ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं आया था। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
अमेरिकी टैरिफ को लेकर विदेश नीति पर सवाल
शुक्रवार को प्रमोद तिवारी ने अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीदने के मुद्दे को लेकर भारत पर लगाए गए 100 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ के संदर्भ में भी केंद्र सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भारी अमेरिकी टैरिफ का सीधा दबाव भारतीय उत्पादों और निर्यात कारोबार पर पड़ सकता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका भारत पर दबाव बनाने की अनुचित नीति अपना रहा है। प्रमोद तिवारी ने कहा कि देश की विदेश नीति में कथित भटकाव के कारण भारत-अमेरिका संबंधों में अस्थिरता की स्थिति पैदा हो सकती है और इसका असर देश के आर्थिक हितों पर भी पड़ सकता है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कथित खामोशी से देश के आर्थिक हितों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से विदेश नीति और आर्थिक हितों से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट एवं प्रभावी रुख अपनाने की मांग की।



