मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में आयुष क्षेत्र के साथ-साथ स्वास्थ्य एवं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग में रोजगार और अवसरों का लगातार विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले आयुष क्षेत्र की विशेष पहचान नहीं थी, लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में अलग मंत्रालय के गठन के बाद पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को नई पहचान और व्यापक मंच मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, होम्योपैथी और सिद्धा जैसी चिकित्सा पद्धतियों को एक प्लेटफॉर्म पर लाकर आयुष क्षेत्र को नई दिशा दी । आज प्रदेश में आयुष के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। नए आयुष कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं तथा मेडिकल और हेल्थ के क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों की श्रृंखला भी खड़ी हो रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले नवचयनित युवा आयुष, स्वास्थ्य तथा एमएसएमई जैसे महत्वपूर्ण विभागों से जुड़ रहे हैं। इन विभागों ने अपनी नई पहचान बनाई है और युवाओं को इनके माध्यम से जनसेवा तथा विकास कार्यों में योगदान देने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने नवचयनित अभ्यर्थियों से पूरी ईमानदारी, निष्ठा और तन्मयता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान नवचयनित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम को आयुष राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, संसदीय कार्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह तथा एमएसएमई राज्यमंत्री हंस राज विश्वकर्मा ने भी संबोधित किया।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष, प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार, प्रमुख सचिव एमएसएमई शशि भूषण लाल सुशील, उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष एस.एन. साबत सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts