ऋषिकेश की पावन भूमि में निवास करने वाली राधा आचार्या पिछले अनेक वर्षों से भारतीय वैदिक परंपरा, शास्त्रों, ज्योतिष, यंत्र, मंत्र और तंत्र के गंभीर अध्ययन एवं साधना से जुड़ी हुई हैं। उनका जीवन केवल अध्ययन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि हिमालय की गोद में स्थित विभिन्न आश्रमों में रहकर तथा गंगोत्री से गोमुख तक की आध्यात्मिक यात्राओं के माध्यम से उन्होंने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा को निकट से जिया और अनुभव किया है।
राधा आचार्या आज भी अपनी नियमित साधना के साथ देश के प्रतिष्ठित संतों, आचार्यों और विद्वानों से निरंतर ज्ञान अर्जित करती रहती हैं। उनके लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का माध्यम नहीं, बल्कि वैदिक ज्ञान के आधार पर जीवन में संतुलन, दिशा और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग है।
विश्व के विभिन्न देशों से लोग अपनी जीवन संबंधी समस्याओं, ज्योतिषीय परामर्श और वैदिक उपायों के लिए उनसे संपर्क करते हैं। वे वैदिक ज्योतिष, यंत्र, मंत्र, तंत्र, वास्तु, हस्तरेखा तथा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के ज्ञान के माध्यम से मार्गदर्शन और उपाय प्रदान करती हैं। इच्छुक व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से मिलने के साथ-साथ फोन पर भी परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।
भारत के अतिरिक्त उन्होंने जापान के टोक्यो में Satori Sutra नाम से वेदांत अध्ययन की एक संस्था की स्थापना की, जहाँ वर्षों तक उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता और वेदांत का अध्ययन एवं शिक्षण किया। उनके विद्यार्थियों में विभिन्न देशों के साधक और जिज्ञासु शामिल रहे हैं।
राधा आचार्या राष्ट्रीय टेलीविजन पर भी अपने ज्ञान को साझा कर चुकी हैं। वे HNN तथा Vartic TV जैसे चैनलों पर आध्यात्मिक और ज्योतिष विषयों पर विशेष कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुकी हैं।
वे दर्शनशास्त्र (Philosophy) में डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (PhD) हैं। उनका शोधकार्य भारतीय गुरुकुल परंपरा में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्ययन पर आधारित है। उनकी पुस्तक “Srimad Bhagvad Gita as Taught in a Traditional Indian Gurukulam” प्रतिष्ठित प्रकाशन संस्थान Motilal Banarsidass द्वारा प्रकाशित हुई है, जिसे भारत और विदेशों में पाठकों द्वारा सराहा गया है।
राधा आचार्या का उद्देश्य प्राचीन भारतीय वैदिक ज्ञान को आधुनिक जीवन से जोड़ते हुए लोगों को आध्यात्मिक स्पष्टता, आत्मबोध और जीवन की चुनौतियों के लिए शास्त्रसम्मत मार्गदर्शन प्रदान करना है।



