सतीश त्रिपाठी-ब्यूरो चीफ( अमृत धारा)
काठमांडू। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह भी केपी शर्मा ओली की तरह तानाशाही वाली केंद्रीकृत सत्ता की तरफ बढ़ रहे हैं। बालेन शाह ने एक ताजा कदम में नेपाल के राष्ट्रीय जांच विभाग को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया है। इस कदम की तुलना पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार की नीतियों से की जा रही है, जिसने सत्ता को एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रीकृत करने में अहम भूमिका निभाई थी। सत्ता अधिक नियंत्रण के चलते ही आखिरकार नेपाल की जनता का गुस्सा फूट पड़ा था, जिसके बाद ओली को इस्तीफा देना पड़ा था।
नेपाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को स्वीकृत की गई नेपाल सरकार (कार्य विभाजन) नियमावली’ के तहत इस खुफिया एजेंसी को गृह मंत्रालय से हटाकर प्रधानमंत्री कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस बात पर बहस चल रही है कि देश की एकमात्र खुफिया एजेंसी को वापस गृहमंत्रालय को सौंपा जाए या प्रधानमंत्री की सीधी निगरानी में रखा जाए।
जानकारों का कहना है कि यह कदम काफी हद तक पूर्व मे ओली के उठाए गए कदमों की तरह ही है। उस समय एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। ओली ने प्रधानमंत्री पद पर बैठने के बाद राष्ट्रीय जांच विभाग, मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग और राजस्व विभाग को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया था।
उस समय ओली के कदम की नेपाल में बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी। इसे सत्ता के केंद्रीकरण का प्रयास बताया गया था। पिछले साल नेपाल में Gez-Z विद्रोह के बाद ओली ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सुशीला कार्की की सरकार ने ओली के दौर में लिए फैसले को पलट दिया था। कार्की ने इन एजेंसियों को उनके संबंधित मंत्रालयों (गृह और वित्त) को वापस सौंप दिया था।ओली की राह पर पीएम बालेन शाह
सतीश त्रिपाठी-ब्यूरो चीफ
काठमांडू। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह भी केपी शर्मा ओली की तरह तानाशाही वाली केंद्रीकृत सत्ता की तरफ बढ़ रहे हैं। बालेन शाह ने एक ताजा कदम में नेपाल के राष्ट्रीय जांच विभाग को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया है। इस कदम की तुलना पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार की नीतियों से की जा रही है, जिसने सत्ता को एक व्यक्ति के हाथों में केंद्रीकृत करने में अहम भूमिका निभाई थी। सत्ता अधिक नियंत्रण के चलते ही आखिरकार नेपाल की जनता का गुस्सा फूट पड़ा था, जिसके बाद ओली को इस्तीफा देना पड़ा था।
नेपाली मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को स्वीकृत की गई नेपाल सरकार (कार्य विभाजन) नियमावली’ के तहत इस खुफिया एजेंसी को गृह मंत्रालय से हटाकर प्रधानमंत्री कार्यालय में स्थानांतरित कर दिया गया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब इस बात पर बहस चल रही है कि देश की एकमात्र खुफिया एजेंसी को वापस गृहमंत्रालय को सौंपा जाए या प्रधानमंत्री की सीधी निगरानी में रखा जाए।
जानकारों का कहना है कि यह कदम काफी हद तक पूर्व मे ओली के उठाए गए कदमों की तरह ही है। उस समय एकीकृत नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी दो-तिहाई बहुमत के साथ सत्ता में आई थी। ओली ने प्रधानमंत्री पद पर बैठने के बाद राष्ट्रीय जांच विभाग, मनी लॉन्ड्रिंग जांच विभाग और राजस्व विभाग को प्रधानमंत्री कार्यालय के अधीन कर दिया था।
उस समय ओली के कदम की नेपाल में बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी। इसे सत्ता के केंद्रीकरण का प्रयास बताया गया था। पिछले साल नेपाल में Gez-Z विद्रोह के बाद ओली ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व वाली सुशीला कार्की की सरकार ने ओली के दौर में लिए फैसले को पलट दिया था। कार्की ने इन एजेंसियों को उनके संबंधित मंत्रालयों (गृह और वित्त) को वापस सौंप दिया था।



