मुझे भी दुनिया दिखला दो माँ
दहेज की फ़िक्र है या खर्च का डर
कौन सा भय हिय मे संजोय हो
सच सच मुझे तुम बतलादो माँ
मुझे भी दुनिया दिखला दो माँ ||

छम छम नाचूँगी आँगन मे तेरे
तेरी बगिया की फुलवारी बन जाउँगी
देकर जन्म मुझे तुम हे मेरी मैया
जग मे एक नन्हा सा फूल खिलवा दो माँ
मुझे भी दुनिया दिखला दो माँ ||

दीदी की छोटी पड चुकी पायल पहन लूँगी
भैया के छोटे पड चुके कपड़े पहन लूँगी
दूध पिलाकर भैया को मै छाछ पी लूँगी
चाहो तो उन्ही की बची झूठन खिलवा दो माँ
मुझे भी दुनिया दिखला दो माँ ||

क्यों वँचित करती हो भैया को प्यार से मेरे
कोसेगा जी को वो हर त्यौहार पर तेरे
मुझे बुलाकर उसकी दुनिया मे हे मेरी माता
भैया के हाथों मे राखी मुझसे बँधवा दो माँ
मुझे भी दुनिया दिखला दो माँ ||

डोली उठेगी माँ मेरी द्वार से तेरे
आशीष के हाथ बहुत से सर पर होगें मेरे
चिड़िया सी उड़ जाऊंगी मै द्वार से तेरे
ये चमत्कार कर जग को तुम दिखला दो माँ
मुझे भी दुनिया दिखला दो माँ ||

छोड़कर इरादा तुम मेरी मौत का
अपनी ममता की बाहों के झूले में
मुझे भी भैया की तरह ही झुलाओगी
येविश्वास आज मुझे तुम दिलवा दो माँ
मुझे भी दुनिया दिखला दो माँ ||

“नन्ही मुन्नी गुड़ियाओं को सादर समर्पित “
“डॉ पंकज कुमार रुहेला “

9761407360

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